महामीडिया न्यूज सर्विस
नवरात्रि में इस विधि से हवन करें

नवरात्रि में इस विधि से हवन करें

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 25 दिन 23 घंटे पूर्व
26/09/2019
भोपाल [महामीडिया]  नवरात्रि के अवसर पर देवी आराधना के साथ हवन का विशेष महत्व है। धर्मशास्त्रों के अनुसार हवन करने से घर का वातावरण शुद्ध होता है और नकारात्मकता समाप्त होती है। हवन में प्राकृतिक पदार्थों, विशेषकर जड़ी-बूटियों का प्रयोग किया जाता है, जिससे घर और उसके आसपास की आबोहवा शुद्ध होती है। हवन या यज्ञ सनातन संस्कृति का एक महत्वपूर्ण कर्मकांड है। कुंड में अग्नि के माध्यम से देवता के निकट हवि पहुंचाने की प्रक्रिया को 'यज्ञ' कहते हैं। हवि, हव्य या हविष्य वो पदार्थ हैं, जिनकी आहुति अग्नि में दी जाती है। घर-परिवार में शुभ प्रभावों की वृद्धि के लिए हवन किया जाता है।नवरात्रि के अवसर पर अष्टमी, नवमी और विजयादशमी को हवन का विशेष महत्व है। इन दिनों में नवरात्रि का समापन किया जाता है और भक्त हवन कर अपने व्रत, आराधना, उपासना की पूर्णाहुति करते हैं। हवन करने से नवरात्रि की आराधना का पूर्ण फल प्राप्त होता है।हवन की सामग्री-नवरात्रि का हवन करने के लिए आम या शुभ पेड़ों की सूखी लकड़ियों का उपयोग किया जाता है। हवन सामग्री में बेल, नीम, पलाश, चंदन की लकड़ी, कलीगंज और देवदार की जड़, गूलर की छाल और पत्ती, पीपल की छाल और उसका तना, बेर और आम की पत्ती और इन दोनो पेड़ों का तना, जामुन की पत्ती, अश्वगंधा की जड़, तिल, कपूर, लौंग, चावल, ब्राम्ही, मुलैठी की जड़, बहेड़ा का फल और हर्रे, घी, शकर जौ, तिल, गुगल, लोभान, इलायची आदी।हवन का प्रारंभ-ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं। इसके बाद शुभ मुहूर्त में हवन का प्रारंभ करें। हवन कुंड में सबसे पहले घी की बत्ती या कपूर जलाकर रख दे। उसके बाद लकड़ियों को हवनकुंड में जमा दें। इसके बाद हवन की आहुति देना प्रारंभ करें।हवन में आहुति-ॐ आग्नेय नम: स्वाहा , ॐ गणेशाय नम: स्वाहा, ॐ गौरियाय नम: स्वाहा, ॐ नवग्रहाय नम: स्वाहा, ॐ दुर्गाय नम: स्वाहा, ॐ महाकालिकाय नम: स्वाहा, ॐ हनुमते नम: स्वाहा, ॐ भैरवाय नम: स्वाहा, ॐ कुल देवताय नम: स्वाहा, ॐ स्थान देवताय नम: स्वाहा, ॐ ब्रह्माय नम: स्वाहा, ॐ विष्णुवे नम: स्वाहा, ॐ शिवाय नम: स्वाहा, ॐ जयंती मंगलाकाली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवाधात्री स्वाहा, स्वधा नमस्तुति स्वाहा, ॐ ब्रह्मामुरारी त्रिपुरांतकारी भानु: क्षादी: भूमि सुतो बुधश्च: गुरुश्च शक्रे शनि राहु केतो सर्वे ग्रहा शांति कर: स्वाहा, ॐ गुरुर्ब्रह्मा, गुरुर्विष्णु, गुरुर्देवा महेश्वर: गुरु साक्षात परब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नम: स्वाहा, ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिंम् पुष्टिवर्धनम्/ उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् मृत्युन्जाय नम: स्वाहा, ॐ शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे, सर्व स्थार्ति हरे देवि नारायणी नमस्तुते।हवन के आखिरी में खोपरा गोला ऊपर से काटकर उसमें घी भरकर हवन कुंड में डाल दे। इस आहुति मंत्र को बोले - 'ओम पूर्णमद: पूर्णमिदम् पुर्णात पूण्य मुदच्यते, पुणस्य पूर्णमादाय पूर्णमेल विसिस्यते स्वाहा।' हवन के समापन पर देवी से अपने ज्ञात-अज्ञात अपराधों के लिए माता से क्षमायाचना करें।

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