महामीडिया न्यूज सर्विस
क्या कश्मीर पर पाकिस्तान का आक्रामक रुख बरकरार रहेगा?

क्या कश्मीर पर पाकिस्तान का आक्रामक रुख बरकरार रहेगा?

admin | पोस्ट किया गया 22 दिन 3 घंटे पूर्व
30/09/2019
भोपाल (महामीडिया) पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने रविवार को अमेरिका से इस्लामाबाद लौटने पर कहा कि जो लोग कश्मीरियों के साथ खड़े हैं वे 'जिहाद' कर रहे हैं और पाकिस्तान कश्मीरियों का साथ देगा, भले ही दुनिया ऐसा न करे। इमरान खान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में संबोधन के लिये 15 मिनट की तय सीमा से बहुत अधिक 50 मिनट के अपने भाषण में आधा समय कश्मीर मुद्दे पर बात कही और चेतावनी देते हुए कहा कि अगर दो परमाणु शक्ति संपन्न पड़ोसियों का आमना-सामना होता है, तो इसके परिणाम सीमाओं से परे होंगे।
जबकि इमरान खान ने जैसा कि उनसे उम्मीद थी, भारत के खिलाफ एक उग्र संघर्ष की शुरूआत करने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा के व्याख्यान में अपनी बारी का इस्तेमाल किया, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का इमरान खान  के साथ कीचड़ भरे गड्ढे में कुश्ती करने के बजाय खुद को बाहर रखने का फैसला सराहनीय था। मोदी ने अपने पूरे भाषण में पाकिस्तान का एक भी बार उल्लेख नहीं किया- बजाय इसके, आतंकवाद के संकट से लड़ने के लिए एक व्यापक अपील की और उन मुद्दों पर सबका ध्यान केंद्रित किया जैसे जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, और गरीबी उन्मूलन । परिपक्व और अपरिपक्व राजनेता के बीच यही अंतर होता है। हालाँकि, इमरान खान को भारत की पहली विदेश सचिव विदिशा मैत्रा ने मुंहतोड़ जवाब दिया।
फिलहाल, भारत की पाकिस्तान के साथ कश्मीर पर बहस कायम है। यह ह्यूस्टन में आयोजित हाउडी मोदी से खींचते हुए वैश्विक राजधानियों में  द्विपक्षीय / बहुपक्षीय बैठकों की श्रृंखला के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र,  न्यूयॉर्क से लेकर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद, जेनेवा में एक दूसरे को चुनौती देने की भूख की तरह बढ़ती रही ।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान कभी अपना कश्मीर राग ख़त्म करेगा? भारत को सतर्क रहना चाहिए। पाकिस्तान हमेशा एक विश्वासघाती पड़ोसी है। यह कश्मीर घाटी में हिंसा के लिए लगभग प्रार्थना करने जैसा है। इमरान खान ने अपने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दिए भाषण के दौरान संकेत दिया कि प्रतिबंध हटाए जाने के बाद क्या होगा इसकी उन्होंने गंभीर भविष्यवाणी की। पाकिस्तान अपने नेटवर्क और राजनीतिक सहयोगियों के माध्यम से पश्चिम में विशेष रूप से यूनाइटेड किंगडम और यूरोप और अमेरिका में भी बहुत मेहनत कर रहा है। भारत को पाकिस्तान की गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए।
हाल ही में, संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर के मुद्दे को उठाते हुए, मलेशियाई प्रधान मंत्री महातिर मोहम्मद ने आरोप लगाया है कि भारत ने जम्मू और कश्मीर पर "आक्रमण और कब्जा" किया है और भारत से इस मुद्दे को हल करने के लिए पाकिस्तान के साथ मिलकर काम करने को कहा है। महातिर मोहम्मद ने कहा कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के बावजूद, जम्मू और कश्मीर पर "आक्रमण और कब्जा" कर लिया है।
हमें ध्यान देना चाहिए कि पाकिस्तानी मामले को अमेरिकी मीडिया, विशेष रूप से तथाकथित उदारवादी समाचार पत्रों में एक ग्रहणशील दर्शक मिले हैं। हालांकि, राजनीतिक प्रणाली के भीतर, समझदार लोग सीमित ही होते हैं। इसलिए, भारत को कश्मीर में प्रतिबंध हटाने और विधानसभा चुनाव कराने के लिए स्थिति बनानी चाहिए। इसे आतंक से लड़ने और कश्मीरी लोगों तक सुविधाये पहुंचने के बीच संतुलन बनाने की जरूरत है। आखिरकार, कश्मीर में स्थिति को सामान्य करने और तेजी से विकास को सुविधाजनक बनाना, आतंकवाद के खिलाफ सबसे अच्छा कवच है। भारत को अब दुनिया को दिखाना चाहिए कि अनुच्छेद 370 को खत्म करने के लिए उसने कश्मीर के बेहतर भविष्य की नींव रखी है। भारत द्वारा 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा वापस लेने के फैसले के बाद पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे का अंतर्राष्ट्रीयकरण करने की कोशिश कर रहा है।

-प्रभाकर पुरंदरे


और ख़बरें >

समाचार

MAHA MEDIA NEWS SERVICES

Sarnath Complex 3rd Floor,
Front of Board Office, Shivaji Nagar, Bhopal
Madhya Pradesh, India

+91 755 4097200-16
Fax : +91 755 4000634

mmns.india@gmail.com
mmns.india@yahoo.in