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मप्र सरकार द्वारा स्थापित "लता मंगेशकर पुरस्कार" उपेक्षा का शिकार

मप्र सरकार द्वारा स्थापित "लता मंगेशकर पुरस्कार" उपेक्षा का शिकार

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 65 दिन 20 घंटे पूर्व
01/10/2019
भोपाल (महामीडिया) स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर के नाम पर मध्यप्रदेश सरकार द्वारा स्थापित "लता मंगेशकर पुरस्कार" उपेक्षा का शिकार होता जा रहा है। तीन साल होने को आए पुरस्कार के लिए संस्कृति विभाग को कोई पात्र नहीं मिला। सरकार ने 2012 से 2016 तक के पुरस्कार एक साथ बांटकर औपचारिकता पूरी की थी तब भी 2013 और 2014 के पुरस्कार वितरित नहीं हो पाए। अब 2017 एवं 2018 के पुरस्कार लंबित हो चुके हैं, 2019 भी खत्म होने को है। इस तरह पांच साल के पुरस्कार फिर एक साथ दिए जाने की स्थिति बन रही है।
सुगम संगीत के क्षेत्र में दिए जाने वाले इस पुरस्कार की देशभर में बड़ी प्रतिष्ठा है। पुरस्कार को लेकर शुरुआती दो दशक तक सरकार ने गंभीरता दिखाई, लेकिन बाद में इसकी अनदेखी होने लगी। वर्ष 1984 में मप्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने लताजी के सम्मान में यह पुरस्कार शुरू किया था।
प्रदेश की संस्कृति मंत्री डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ भी 'लता पुरस्कार' की अनदेखी को लेकर आहत हैं। वह कहती हैं कि 'पूर्ववर्ती सरकार की कथनी-करनी में फर्क था, मैंने स्वयं 1994 से चार साल तक बतौर विभागीय मंत्री ये पुरस्कार बांटे, तब इसकी गरिमा देखते ही बनती थी। अब तो यह कार्यक्रम एक हॉल में सिमट कर रह गया। पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने इसकी क्या गत कर दी सबके सामने है।'
डॉ. साधौ ने बताया कि हमने इस साल से पुरस्कार की राशि बढ़ाकर दो लाख रुपए करने की घोषणा विधानसभा में की है। इस साल दिसंबर में यह कार्यक्रम विस्तृत और भव्य स्वरूप में आयोजित किया जाएगा।

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