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अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है दशहरा

अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है दशहरा

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 67 दिन 11 घंटे 53 सेकंड पूर्व
03/10/2019
भोपाल (महामीडिया) भारतीय संस्कृति में दशहरा का बहुत अधिक महत्व है। नवरात्रि के नौ दिनों के बाद अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को इसका आयोजन किया जाता हैं। धार्मिक ग्रंथो के अनुसार भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था तथा देवी दुर्गा ने नौ रात्रि एवं दस दिन के युद्ध के उपरान्त इसी दिन महिषासुर नामक राक्षस पर विजय प्राप्त की थी। दशहरा को असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है, इसलिए इस दशमी को विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता के अनुसार दशहरा वर्ष की तीन अत्यन्त शुभ तिथियों में से एक है।
इस दिन शस्त्र-पूजा और नए कार्य प्रारम्भ करने का विधान है। ऐसा विश्वास है कि इस दिन से जो भी कार्य प्रारंभ किए जाते है वो अवश्य ही सफल होते हैं। प्राचीन काल में राजा इसी दिन विजय की प्रार्थना कर रण-यात्रा के लिए प्रस्थान करते थे। इस शुभ दिन देश में जगह-जगह भव्य मेलों का आयोजन किया जाता हैं।
इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है। दशहरा शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के शब्द 'दश-हर' से हुई है जिसका अर्थ है दस बुराइयों से छुटकारा पाना। वो दस बुराइयाँ हैं- क्रोध, लोभ, मोह, हिंसा, आलस्य, झूठ, अहंकार, मद, चोरी, घूसखोरी इत्यादि।
राम-रावण युद्ध नवरात्र में हुआ था और रावण की मृत्यु दशमी को हुआ था जिसके लिए विजयदशमी के दिन रावण का पुतला बनाकर जलाया जाता है। इस दिन भगवान रामचंद्र चौदह वर्ष का वनवास भोगकर तथा रावण का वध कर अयोध्या पहुंचे थे इसलिए भी इस पर्व को विजयदशमी कहा जाता है।
इस पर्व से जुडी एक अन्य कथा के अनुसार महिषासुर को उसकी उपासना से खुश होकर देवताओं ने उसे अजय होने का वरदान दे दिया था. उस वरदान को पाकर महिषासुर ने उसका दुरूपयोग करना शुरू कर दिया और नर्क को स्वर्ग के द्वार तक विस्तारित कर दिया। महिषासुर ने सूर्य, चन्द्र, इंद्रा, अग्नि, वायु, यम, वरुण और अन्य देवताओं के भी अधिकार छीन लिया और स्वर्गलोक का मालिक बन बैठा। महिषासुर के दुस्साहस से क्रोधित होकर देवताओं ने माँ दुर्गा की रचना की। महिषासुर का विनाश करने के लिए सभी देवताओं ने अपने अस्त्र-शस्त्र देवी दुर्गा को समर्पित कर दिए थे जिससे वह बलवान हो गयी थी। नौ दिनों तक उनकी महिषासुर से संग्राम चला और अंत में महिषासुर का वध कर दिया।
दशहरा पर्व तिथि व मुहूर्त 
विजय मुहूर्त- 14:04 से 14:50
अपराह्न पूजा समय- 13:17 से 15:36
दशमी तिथि आरंभ- 12:37 (7 अक्तूबर)
दशमी तिथि समाप्त- 14:50 (8 अक्तूबर)

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