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देश भर में विजयादशमी की तैयारी शुरू

देश भर में विजयादशमी की तैयारी शुरू

admin | पोस्ट किया गया 20 दिन 10 घंटे पूर्व
03/10/2019
नई दिल्ली [ महामीडिया ] भारतभर में दशहरा या विजयदशमी एक बड़े उत्सव के तौर पर मनाया जाता है।बंगाल, बिहार और उड़ीसा जैसे राज्यों में जहां दुर्गा पूजा के दौरान मूर्ति स्थापाना और पंडाल निर्माण पर जोर रहता है वहीं, उत्तर भारत के राज्यों जैसे यूपी, दिल्ली और आसपास के राज्यों में नवरात्रि के नौ दिनों में रामलीला का आयोजन और दशमी के दिन दशहरा और रावण वध की धूम रहती है। दशहरा या विजयदशमी का त्योहार भगवान राम की रावण पर और देवी दुर्गा की महिषासुर पर जीत का प्रतीक है। ऐसे में हम आपको बता रहे हैं उन जगहों के बारे में जहां का दशहरा, देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर में फेमस है...
मैसूर का दशहरा
मैसूर का दशहरा भी वर्ल्ड फेमस है। यहां दशहरे के मौके पर निकलने वाली झांकी को देखने के लिए दुनियाभर से पर्यटक यहां आते हैं। मैसूर का दशहरा सेलिब्रेशन 9 दिनों तक चलता है और आखिरी दिन यानीं दसवें दिन विजयदशमी का त्योहार मनाया जाता है। इस दौरान ग्रैंड प्रोसेशन निकाला जाता है औऱ सिर्फ मैसूर पैलेस ही नहीं बल्कि पूरा शहर दुल्हन की तरह सजाया जाता है। शहर के प्रमुख चामुंडेश्वरी मंदिर में भी दशहरा फेस्टिवल जोर शोर से मनाया जाता है।
भारतभर में दशहरा या विजयदशमी एक बड़े उत्सव के तौर पर मनाया जाता है। इस पर्व को कहीं श्रीराम के रावण पर विजय तो कहीं दुर्गा देवी द्वारा महिषासुर राक्षस के वध के तौर पर बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। दरअसल हिन्दु मान्यताओं के अनुसार यह समय धर्म-व्रत को सर्मपित रहता है, बस इसके रीति-रिवाज सभी प्रांतों के अपने अलग रहते हैं.जैसे दिल्ली में इसे दशहरा और बंगाल में यह दुर्गा पूजा के नाम से प्रचलित है, वहीं मैसूर में इसे दसरा और गुजरात में नवरात्रि पर्व के तौर पर देखा जाता है।
कोलकाता, पश्चिम बंगाल
कोलकाता में आपको नवरात्रों के समय एकदम अलग ही माहौल नजर आएगा.यहां पूजा के छठे दिन से लेकर विजयदशमी तक अलग-अलग थीम पर बने पंडालों की सैर बड़ी मनमोहक लगती है.इन चार दिनों तक कोलकाता की सड़कों पर अलग ही रौनक लगी रहती है,जिसका हिस्सा बनना अपने में यादगार अनुभव है. हालांकि यह पर्व देवी प्रतिमा के विसर्जन से यहां अपने अंतिम पड़ाव पर आ जाता है, मगर लोगों का अपने सगे-संबंधियों से मिलना-जुलना जारी रहता है.
मैसूर, कर्णाटक
मैसूर में दशहरा की अलग ही राजसी छठा हर कहीं बिखरी मिलती है. यहां का राजमहल 10 दिनों तक 10,000 बल्बों की रोशनी में जगमगाता रहता है. दरअसल शहर की सड़कों पर स्थानीय लोग इक्ट्ठा होकर, देवी की शोभायात्रा के आगे रंगबिरंगे परिधानों में सजकर नाचते-गाते यह त्योहार साथ मनाते हैं. दरअसल विजयदशमी के दिन स्थानीय भाषा में जम्बू सवारी नाम से मैसूर की सड़कों से जुलूस निकाला जाता है.
कुल्लू, हिमाचल प्रदेश
ऐसे दशहरे का त्योहार देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है लेकिन कुल्लू में इस पर्व की अपनी पारंपरिक और ऐतिहासिक महत्व है. यहां जब पूरे देश में विजयदशमी की समाप्ति होती है तो उस दिन से घाटी के धलपुर मैदान से दशहरे के उत्सव की असल मायनों में शुरूआत होती है. वहीं दशहरा के आखिरी दिन लंका को प्नतीकात्मक रूप से नदी किनारे घास और लकड़ी को जलाकर नष्ठ करने की परंपरा है.
अहमदाबाद,गुजरात
देवी के नौ रूपों की अराधना के साथ अहमदाबाद, अपने शहर भर में आधी रात तक चलते गरबा उत्सव के लिए खासा प्रसिद्ध है.इसके अलावा इन नौ दिनों तक पूरा शहर पूरे भक्तिमय वातावरण में डूबा रहता है.हर दिन देवी पूजा के बाद उनकी प्रतिमा के चारों ओर लोग रातभर गरबा करते हैं.
बस्तर, छत्तीसगढ़
दशहरा के समय जगदालपुर स्थित धनतेश्वरी मंदिर में आस-पास के गांव के सभी कबीलों के लोग अपनी अराध्य देवी लाकर पूजा-अर्चना करते हैं.यहां दशहरा पर्व 75 दिनों तक चलता है,जिसमें रथ यात्रा के साथ होते खास कलाबाजी देख आप हैरान रह जाएंगे.इस समय छत्तीसगढ़ के सभी समुदाय के लोग दशहरा मनाने के लिए अपनी-अपनी खास तैयारी करके आते हैं,जिनको देखना अपने आप में अनोखा अनुभव है.
विजयवाड़ा,आंध्रा प्रदेश
कृष्णा नदी के किनारे बने श्री कनका दुर्गा मंदिर से दशहरा की 10 दिनों की शुरूआत होती है.यहां कनक दुर्गा देवी को दस दिनों तक अलग-अलग अवतारों में सजाया जाता है.वहीं विजयवाड़ा कनक दुर्गा मंदिर की भी खास आभा देखते ही बनती है.यहां दशहरा के समय कई तरह की पूजा होती है जिसमेे सरस्वती पूजा की खास मान्यता है. इसके अलावा काफी संख्या में श्रद्धालु कृष्णा नदी में स्नान भी करते हैं.
वाराणसी, उत्तर प्रदेश
नवरात्रों के समय वाराणसी में आपको आध्यात्मिकता और उत्सव की चहलपहल का बेजोड़ मेल देखने मिलेगा.जहां रामलीला की अलग ही धूम रहती है.हालांकि इस समय सारा शहर ही रामलीला मैदान में तब्दील हो जाता है,पर शहर से 15 कि.मी.दूर रामनगर की रामलीला ज्यादा प्रसिद्ध है.यहां एक महीने तक पूरा मेला ही लगा रहता है,जहां अशोक वाटिका, जनकपुरी, पंचवटी की तरह झांकी भी बनाई जाती है.
दिल्ली
देश की राजधानी दिल्ली में दशहरा की अलग ही धमक रहती है, जिसमें विजयदशमी के दिन जलते रावण के पुतले के आस-पास सजते मेले सैलानियों के लिए आकर्षण का केन्द्र बनते हैं.यहां यह त्योहार खासकर रावण पर श्रीराम के विजय के तौर पर मनाया जाता है,इसलिए शहर भर के राम मंदिरों की छठा देखते ही बनती है.औसतन दिल्ली में हर साल 1000 रामलीला और 250 पूजा पंडाल सजते हैं.
कोटा,राजस्थान
कोटा में दशहरा काफी बड़े आकार पर आयोजित होता है,जिसमें भारी संख्या में विदेशी सैलानी भी जुटते हैं.यहां आपको सबसे ऊंचे 75 फीट का रावण का पुतला देखने को मिलेगा.इसके अलावा देशभर से बुलाए कलाकारों से सजे सांस्कृतिक कार्यक्रम में शामिल होकर आप दशहरा का अलग मजा उठा सकते हैं.यह कार्यक्रम पूरे 15 दिनों के लिए आयोजित होते हैं.
कुल्लू का दशहरा
ऐसी मान्यता है कि कुल्लू का दशहरा सेलिब्रेशन 17वीं शताब्दी में शुरू हुआ था जब कुल्लू राजा-महाराजाओं का गढ़ माना जाता था। यहां का दशहरा सेलिब्रेशन भी अलग ही लेवल पर होता है जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने-अपने आराध्य देव की मूर्ति को डोली में बिठाकर झांकी निकाली जाती है और मंदिर मैदान में स्थित कुल्लू के मुख्य भगवान भगवान जगन्नाथ से मिलने पहुंचते हैं। यहां दशहरा का उत्सव 7 दिनों तक चलता है जिसमें नाच-गाने के साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाता है।
बस्तर का दशहरा
आपको जानकर हैरानी होगी कि बस्तर का दशहरा पूरे 75 दिनों तक चलता है। छत्तीसगढ़ राज्य का सबसे खूबसूरत शहर है बस्तर जो अपनी प्राकृतिक और आदिवासी संस्कृति के साथ ही दशहरा सेलिब्रेशन के लिए भी मशहूर है। हालांकि बस्तर के दशहरे में भगवान राम या रामायण से जुड़ा को भी किरदार शामिल नहीं होता। ऐसी मान्यता है कि बस्तर या जगदलपुर के दशहरे की शुरुआत 13वीं शताब्दी में काकातिया राजा ने की थी जो यहां उस वक्त शासन करते थे। दशहरे के मौके पर रथ यात्रा भी निकाली जाती है।
विजयवाड़ा, आंध्र प्रदेश
कृष्णा नदी के किनारे बने श्री कनका दुर्गा मंदिर से दशहरा की 10 दिनों की शुरूआत होती है। यहां कनक दुर्गा देवी को दस दिनों तक अलग-अलग अवतारों में सजाया जाता है। वहीं विजयवाड़ा कनक दुर्गा मंदिर की भी खास आभा देखते ही बनती है। यहां दशहरा के समय कई तरह की पूजा होती है जिसमेे सरस्वती पूजा की खास मान्यता है। इसके अलावा काफी संख्या में श्रद्धालु कृष्णा नदी में स्नान भी करते हैं।



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