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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने लिंचिंग को लेकर चिंता व्यक्त की

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने लिंचिंग को लेकर चिंता व्यक्त की

admin | पोस्ट किया गया 13 दिन 1 घंटे पूर्व
09/10/2019
8 अक्टूबर को विजयादशमी के अवसर पर स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) सुप्रीमो मोहन भागवत ने 'लिंचिंग' शब्द पर गंभीर चिंता व्यक्त की और भीड़ द्वारा हत्याओं के बढ़ते चलन की निंदा करते हुए यह भी कहा कि ऐसी घटनाएं एक तरफा नहीं होती है ।
उन्होंने भीड़ हिंसा के लिए 'लिंचिंग' शब्द के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई और कहा कि यह अल्पसंख्यकों में डर पैदा करने और भारत और हिंदू धर्म को बदनाम करने का एक सुनियोजित प्रयास था।
इसमें कोई संदेह नहीं है, हाल के दिनों में देश में भीड़ हत्या की घटनाओ में वृद्धि हुई है  । जुलाई में, सुप्रीम कोर्ट ने की लगातार हो रही मॉब लिंचिंग की  घटनाओं की निंदा की थी और सरकारों से कहा था कि वे शांति और हमारे बहुलवादी समाज की धर्मनिरपेक्ष संस्कृति को बनाए रखने के लिए कानून और व्यवस्था बनाए रखने के अपने संवैधानिक कर्तव्य का निर्वहन करें। 
हम इस तथ्य से इनकार नहीं कर सकते हैं कि 1 जनवरी, 2009 और 29 अक्टूबर, 2018 के बीच 254 धार्मिक पहचान आधारित घृणा अपराध दर्ज किए गए। भारत के बहुसंख्यक समुदाय में गाय और भगवान राम का नाम को पवित्र माना जाता हैं।
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि मॉब लिंचिंग का दोष किसी एक समुदाय पर डालना सही नहीं है और भीड़ हिंसा के मामलों की रिपोर्ट के साथ उन्होंने इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने यह कहते हुए अपने रुख को स्पष्ट किया कि-ऐसी घटनाएं एकतरफा नहीं होती है। भागवत के अनुसार ऐसी खबरें भी आई हैं जिसमे समाज के एक गुट द्वारा समाज के दुसरे गुट के व्यक्ति पर हिंसा, उन्हें सामाजिक हिंसा का शिकार दर्शाने के लिए किया जाता हैं ।
इस तरह की घटनाएं एकतरफा नहीं हुई हैं। किसी को भी कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं है और किसी को भी सिर्फ गाय-वध या धार्मिक विश्वास के संदेह के नाम पर मौत के घाट उतार देना सही नहीं है। यह केंद्र के साथ-साथ राज्य सरकारों का भी कर्तव्य है की वह ऐसी घटनाओं पर रोक लगाए।
हमें यह भी जानना चाहिए कि केवल सख्त कानून बनाना ही पर्याप्त नहीं होगा। हर कोई जानता है कि हत्या किसी व्यक्ति को मौत की सजा दे सकती है। लेकिन फिर भी, हर साल बड़ी संख्या में हत्याएं की जाती हैं। लोग जानते हैं कि भारतीय दंड संहिता मौजूद है और हर अपराध के लिए कारावास का प्रावधान है, फिर भी हर रोज़  हजारों अपराध होते हैं।
हमें समाज की सामूहिक चेतना में सामंजस्य-सत्त्व पैदा करने की आवश्यकता है, जहां केवल सतोगुण ही ठहर सकता  है। किसी भी मन और हृदय से नकारात्मकता पैदा नहीं होती है। परम पावन महर्षि महेश योगी जी ने इस तरह की भीड़ नकारात्मकता को रोकने के लिए वैज्ञानिक रूप से सिद्ध वैदिक प्रौद्योगिकी विकसित की है। सरकारों को इस तरह की तकनीकों को अपनाना चाहिए और भीड़-हत्या को रोकना चाहिए।

प्रभाकर पुरंदरे
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