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मध्यप्रदेश कांग्रेस में फिर दिखा गुटबाज़ी का असर

मध्यप्रदेश कांग्रेस में फिर दिखा गुटबाज़ी का असर

admin | पोस्ट किया गया 35 दिन 13 घंटे पूर्व
12/10/2019
भोपाल (महामीडिया) मध्यप्रदेश कांग्रेस में एक बार फिर गुटबाज़ी नज़र आई, अखिल भारतीय कांग्रेस के महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कमलनाथ नीत सत्तारूढ़ प्रदेश सरकार पर वादा पूरा न करने का आरोप लगाया।  उन्होंने कहा कि अभी सभी किसानों की कर्जमाफी नहीं की गई है।  सिर्फ 50 हजार रुपये का कर्ज माफ किया गया, जबकि कांग्रेस ने 2 लाख रुपये तक का कर्ज माफ करने का वादा किया था। किसानों के 2 लाख रुपए तक के कर्ज को माफ किया जाना चाहिए। 
सिंधिया के बयान ने सत्तारूढ़ दल के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी हलचल पैदा कर दी है । 21 अक्टूबर को अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित झाबुआ विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले मुख्यमंत्री कमलनाथ पर उनका यह हमला, कई राज़ उजागर करता है।  इस सीट पर जीत 'अल्पसंख्यक' कांग्रेस सरकार के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है। सभी जानते हैं कि वर्तमान राज्य सरकार, तीन मजबूत राजनेताओं के खेमों से चुने गए विधायकों की मदद से बनाई गई थी, जिनमे कमलनाथ, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया है।
भिंड में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए सिंधिया ने कहा कि "चुनाव से पहले कांग्रेस ने किसानों से 2 लाख रुपये तक के कृषि ऋणों माफ़ करने का वादा किया था, लेकिन केवल 50 हजार तक के फसल ऋण माफ हुए हैं ।  सिंधिया ने राज्य में भारी बारिश और बाढ़ के कारण फसल नुकसान का सामना करने वाले किसानों को मुआवजा जारी करने में राज्य सरकार की विफलता का मजबूती के साथ विरोध किया।"
सिंधिया समर्थक हमेशा से ही अपने नेता को प्रदेशाध्यक्ष बनाए जाने की मांग करते रहे है। यह कहा जा सकता है कि उनका ऐसा करना सत्ताधारी पार्टी की राजनीति को चुनौती देने जैसा ही है । कुछ दिन पहले ही सिंधिया ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से आत्मनिरीक्षण का आह्वान किया था ताकि पार्टी को बर्बाद होने से बचाया जा सके। इसी के साथ मुख्य विपक्षी दल भाजपा को कर्ज माफी के मुद्दे पर कमलनाथ सरकार पर हमला करने का एक और अवसर मिल गया । जून 2019 में, सीएम कमलनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक के दौरान सीएम के वफादार मंत्रियों और सिंधिया के वफादार मंत्रियों के बीच वाकयुद्ध देखा गया।
कांग्रेस और बीजेपी, दोनों ही दलों में बयानबाजों की कमी नहीं है, लेकिन दोनों के बीच बड़ा अंतर यह है कि जहां बीजेपी के राजनेता सार्वजनिक रूप से कुछ भी बोलने में अनुशासित दिखाई देते हैं, वहीं कांग्रेस के राजनेता पार्टी पर बात रखते समय अपना संयम काबू में नहीं रख पाते।  विशेषकर अपने व्यक्तिगत नेताओं की 'जी हजूरी' में व्यस्त रहने के कारण वो अपनी पार्टी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखा नही पाते जिससे सरकार को ही नुक्सान होता है।
एमपी कांग्रेस में गुटबाज़ी कोई नई बात नहीं है। "यूनाइटेड वी स्टैंड, डिवाइडेड वी फॉल", जिसका मतलब एकता में अटूट शक्ति होती है। लम्बे समय से प्रभावी इस वाक्यांश का राज्य की सत्तारूढ़ कांग्रेस के शब्दकोश में कोई जगह नहीं है। 15 साल तक राज्य में कांग्रेस को सत्ता से बाहर रखने में कड़वी गुटबाजी काफी हद तक जिम्मेदार थी।
-प्रभाकर पुरंदरे


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