महामीडिया न्यूज सर्विस
वीर सावरकर को भारत रत्न देने पर सियासत तेज

वीर सावरकर को भारत रत्न देने पर सियासत तेज

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 48 दिन 15 घंटे पूर्व
20/10/2019
मुंबई (महामीडिया) नासिक के भगूर गांव में एक 12 वर्षीय बच्चे ने 19वीं सदी के अंतिम वर्षों में अपनी हथेली पर गर्म दीया रखकर कसम खाई थी, ?शत्रूला मारिता मारिता मरेतो झुंजेन?। अर्थात, शत्रु को मारते-मारते इस हद तक जूझेंगे कि किसी एक की मौत हो जाए। यही बच्चा आज स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर के नाम से जाना जाता है और उन्हें भारत रत्न दिए जाने की मांग पर एक वर्ग द्वारा ऐतराज किया जा रहा है क्योंकि उन्होंने दोहरे काले पानी की सजा पाने के बाद तत्कालीन अंग्रेज सरकार के सामने अपनी रिहाई की याचिका दायर की थी।
यह बात आज की परिस्थिति में समझी जा सकनी मुश्किल है कि सावरकर ने अंडमान की सेल्यूलर जेल में रहने के दौरान अंग्रेज सरकार के सामने छह बार क्यों रिहाई का आवेदन किया? ये वही सावरकर थे, जो बचपन से ही लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय एवं बिपिनचंद्र पाल की उग्र विचारधारा से प्रभावित थे। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी, लेकिन उच्च शिक्षा का शौक था। इसलिए विवाह से पहले उन्होंने शर्त रखी कि जो व्यक्ति उनकी उच्च शिक्षा का खर्च वहन कर सके, उसकी बेटी से ही विवाह करेंगे।
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