महामीडिया न्यूज सर्विस
महाराष्ट्र और हरियाणा में फिर से कमल खिलने को तैयार

महाराष्ट्र और हरियाणा में फिर से कमल खिलने को तैयार

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 24 दिन 15 घंटे पूर्व
23/10/2019
भोपाल (महामीडिया) विपक्ष में कोई बड़ा नाम नहीं होने के कारण,  महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों के बाद आये सभी एग्जिट पोल्स ने सत्तारूढ़ भाजपा को एक बड़े जनादेश के साथ जीत की भविष्यवाणी की है, दोनों राज्यों में मतदाताओं ने सोमवार को अपने मतपत्र डाले थे। महाराष्ट्र में 60.46% मतदान हुआ, वहीं हरियाणा में यह आंकड़ा 66% था। हालांकि आधिकारिक परिणाम 24 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे, एग्जिट पोल ने महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के लिए आसान जीत की भविष्यवाणी की है।
कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के बीच के आंतरिक विरोधाभास जैसे कारणों की वजह से एक भी वोट डालने से पहले ही बीजेपी का चुनाव जीतना लगभग तय माना जा रहा था। इस विधानसभा चुनावों में भाजपा के प्रमुख चुनावी मुद्दों में राष्ट्रवाद प्रमुख मुद्दा था और ऐसा लगता है उनके इस दावे का असर भी हुआ है। दोनों राज्यों में लोगों ने भाजपा के राष्ट्रवाद की पिच का समर्थन किया, उसके उलट विपक्ष ने स्थानीय मुद्दों और आर्थिक मंदी पर सरकार को घेरने की कोशिश की, जिसका कोई असर नहीं दिखा ।
लोगों को देखकर लगता है कि उनकी  बीजेपी के प्रति आस्था अब तक बरकरार है और उन्हें पूरा भरोसा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मौजूदा आर्थिक मंदी को भी जल्दी और सुसंगत तरीके से कार्य करके दुरुस्त कर देंगे। 
एग्जिट पोल से संकेत मिलता है कि बीजेपी की अगुवाई वाले महागठबंधन या फिर कहें महायुति (ग्रैंड अलायंस) को महाराष्ट्र में विधानसभा की कुल 283 सीटों में से 166 और 243 के बीच जीत हासिल हो सकती है। बीजेपी-शिवसेना की निवर्तमान विधानसभा में 185 सीटों का स्पष्ट बहुमत मिला था। कांग्रेस-राकांपा गठबंधन को 48 और 90 सीटों के बीच सीटें मिलने का अनुमान है। यदि एग्जिट पोल करने वालों को अगर पूरा अधिकार मिल जाता, तो भाजपा-सेना गठबंधन को दूसरी बार भी सीधा जनादेश दे देते ।
विपक्ष के लिए, मंदी के बावजूद महाराष्ट्र और हरियाणा में दुबारा हार और लोगों पर इसका अवधारणात्मक प्रभाव अच्छे नेतृत्व और रणनीतियों की गंभीरता को उजागर करता है। कांग्रेस को उनके ही अंतर्कलह की कीमत चुकानी पड़ रही है। हाल ही में सचिन पायलट और ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे युवा और गतिशील नेताओं की उनके ही प्रदेशों में वरिष्ठ प्रतिद्वंद्वियों द्वारा किनारा किये जाने से मतदाताओं के बीच पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा है ।
भाजपा ने भी कांग्रेस की कमजोरी का पूरा फायदा उठाया।  कोई शक नहीं, महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस ने शिवसेना के लगातार नखरों के बीच, मराठा आरक्षण के मुद्दे और किसानों की अशांति जैसे मुद्दों को अपने सक्षम संचालन से प्रभावित किया था। ऐसा लगता है कि भाजपा का कमल महाराष्ट्र और हरियाणा में फिर से खिलने के लिए तैयार है।

-प्रभाकर पुरंदरे

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