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दीपावली पर्व पर नौ त्योहारों की पांच दिनी शृंखला कल से

दीपावली पर्व पर नौ त्योहारों की पांच दिनी शृंखला कल से

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 19 दिन 1 घंटे पूर्व
24/10/2019
नई दिल्ली [ महामीडिया ]श्री-समृद्धि की कामना का पर्व दीपावली नौ त्योहारों की पांच दिनी शृंखला है। कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी से कार्तिक शुक्ल द्वितीया तक चलने वाले पांच दिवसीय ज्योति पर्व का श्रीगणेश 25 अक्टूबर को धनतेरस यानी धन त्रयोदशी से हो जाएगा। तिथियों के फेर से इस बार धनवंतरि जयंती 26 अक्टूबर को मनाई जाएगी, इसी दिन दोपहर बाद चतुर्दशी लगने से हनुमान जयंती व नरक चौदस के विधान पूरे किए जाएंगे।कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि 25 अक्टूबर की शाम 4.32 बजे लग रही है, जो 26 अक्टूबर को दिन में 2.08 बजे तक रहेगी। ऐसे में धनतेरस 25 अक्टूबर को और धनवंतरि जयंती 26 अक्टूबर को मनाई जाएगी। कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के प्रदोष काल में  यमराज के निमित्त दीपदान का विशेष महत्व बताया गया है। वहीं, भगवान धनवंतरि का प्राकट्य पूर्वाह्न में होने से इसे 26 अक्टूबर को मनाया जाएगा। शास्त्रों में हनुमान जयंती साल में दो बार मनाए जाने का विधान है। चैत्र और कार्तिक मास में। यह 26 को मनाई जाएगी।
25 अक्टूबर धनतेरस -
धनतेरस पर सोना-चांदी, गहना-बर्तन आदि खरीद कर लक्ष्मी-गणेश, कुबेर का पूजन किया जाता है। लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त दोपहर 2.14 से 3.45 बजे तक और शाम को 6.50 से 8.40 तक है।
26 अक्टूबर धनवंतरि जयंती -
भगवान धनवंतरि कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि के पूर्वाह्न (दिन का पहला भाग) में प्रकट हुए थे। अत: तिथि के पूर्वाह्न (जोकि 26 को पड़ रहा है) में ही धनवंतरि जयंती मनाई जाएगी।
हनुमान जयंती -
हनुमान जी का जन्म कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी पर मंगलवार को मेष लग्न में सायंकाल हुआ। कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी (26 अक्टूबर) पर मेष लग्न शाम 5.13 बजे से 6.50 बजे तक है। इस बार हनुमान जयंती पर शनिवार का अद्भुत संयोग है।

नरक चौदस -
नरक चौदस चंद्रोदय व्यापिनी कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी में मनाते हैं। चतुर्दशी 26 अक्टूबर को दोपहर 2.09 बजे लग रही है। प्रदोष काल (सूर्यास्त यानी शाम 5.37 बजे से 28 मिनट आगे तक) में तिल के तेल से भरे चार बत्तियों वाले दीप यमराज के निमित्त जलाने चाहिए।
27 अक्टूबर-

दिवाली पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 6.46 से 8.42 बजे तक :

दीपावली कार्तिक अमावस्या यानी 27 अक्टूबर को मनाई जाएगी। प्रदोष काल में स्थिर लग्न की प्रधानता होने से यह काल लक्ष्मी पूजन के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। अत: पूजन का शुभ मुहर्त स्थिर लग्न वृष में शाम 6.46 से 8.42 बजे तक होगा। इस अवधि में लग रहा पद्मयोग बेहद खास है।

काली पूजा :

कार्तिक अमावस्या की रात बंगीय समाज में काली पूजा या श्यामा पूजा का विधान है। निशीथ काल में इसके पूजन विधान निभाए जाते हैं। यह अवधि रात 12 से तीन बजे तक की होती है। इस दौरान तांत्रिक गण तंत्र पूजा आदि भी करते हैं।

28 अक्टूबर गोवर्धन पूजा :

कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा पर पूरे देश में गोवर्धन पूजा की जाएगी। तिथि विशेष पर गाय के गोबर से गोवर्धन बनाकर पूजन किया जाता है। प्रतिपदा 28 अक्टूबर को प्रात: 9.44 बजे लग रही है, अत: पूजन विधान इस अवधि के बाद शुरू होंगे।

अन्नकूट -

अन्नकूट गोवर्धन पूजा का ही हिस्सा है। इसे भी कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को ही मनाया जाता है। तिथि विशेष पर देवालयों में प्रभु को कूटकूट कर बनाए गए 56 प्रकार के पकवानों का भोग अर्पित किया जाता है।
29 अक्टूबर-
कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यम द्वितीया भाई दूज के रूप में मनाई जाती है। यह पर्व इस बार अनुदया द्वितीया (29) को मनाया जाएगा। प्रात: स्नानादि कर अक्षत-पुष्प से अष्टदल पर गणेश स्थापना के बाद व्रत संकल्प लेकर गणेश जी, यम, यमदूतों व यमुना जी का पूजन किया जाता है।
चित्रगुप्त जयंती -
कार्तिक शुक्ल द्वितीया पर कलम दवात के देव चित्रगुप्त की पूजा की जाती है। संपूर्ण ऐश्वर्यों के स्वामी और रत्न आदि वैभव के प्रदाता चित्रगुप्त सृष्टि के सभी प्राणियों के पाप-पुण्य का लेखा- जोखा रखते हैं।

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