महामीडिया न्यूज सर्विस
अमेरिका और इजरायल की चार दवा कंपनियों पर 15 खरब का जुर्माना

अमेरिका और इजरायल की चार दवा कंपनियों पर 15 खरब का जुर्माना

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 22 दिन 23 घंटे पूर्व
28/10/2019
नई दिल्‍ली [महामीडिया]अमेरिका और इजरायल की चार दवा कंपनियों को अपने डर की कीमत 15.22 खरब रुपये या 21.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर देकर चुकानी पड़ी है। दरअसल, यह पूरा मामला कंपनी की साख बचाने की एक कवायद था। जिन कंपनियों ने इतनी बड़ी रकम देनी पड़ी वो कंपनियां ओपियाड दवा बनाती हैं। इसकी वजह से अमेरिका में बीते बीस वर्षों चालीस हजार लोगों की मौत हुई हैं। आपको बता दें कि ओपियाड एक दर्द निवारक दवा है।क यह दवा कुछ नशीले पदार्थों के मिश्रण से तैयार होती है। इसमें हेरोईन भी शामिल है। ओपियाड के अलावा  मॉर्फिन, हाइड्रोकोडोन, ऑक्सिकोडोन, कोडाइन भी इसी तरह की कुछ दवाएं हैं। दर्दनिवारक के तौर पर कंपनियों ने इन दवाओं का जबरदस्‍त प्रचार-प्रसार किया था। इसके अलावा इन दवाओं के प्रयोग को लेकर भी कंपनी ने लोगों को जागरुक करने के लिए इसकी जानकारी को सार्वजनिक किया था। यह दवाएं बिना डॉक्‍टरों के प्रेसक्रिप्‍शन के नहीं मिलती थीं। लेकिन अमेरिका में काफी संख्‍या में लोग इसके आदी हो गए थे। लोगों की मौत की वजह कहीं न कहीं इसके ओवरडोज का इस्‍तेमाल था। लोगों की मौतों के बाद उनके पीडि़त परिवारों ने हजारों की तादाद में अमेरिकी अदालतों में मुकदमे दायर हुए।इनमें से एक मामला ओहायो अदालत में भी आया था। संघीय अदालत के जज चाहते थे कि मामले की सुनवाई से पहले दवा कंपनियां अपनी गलती मानते हुए जुर्माने की रकम को अदा कर दें। इसके लिए अदालत ने कुछ समय सीमा भी निर्धारित की थी। लेकिन संघीय अदालत में मामले की सुनवाई शुरू करने से पहले ही कंपनियों ने अदालत की बात मानते हुए 21.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर का भुगतान करने पर राजी हो गईं। इसमें इजरायल की कंपनी दो करोड़ डालर और  देने पर राजी हुई थी।कंपनियां इसके इसके साथ ही इस बात पर भी राजी हुईंं कि वह ओपिओड के आदी लोगों के इलाज के लिए दूसरी जेनेरिक दवा उपलब्‍ध करवाएंगी। इस पूरे मामले में कोर्ट ने कंपनियों की साख को देखते हुए जुर्माने के भुगतान के बाद उन पर किसी तरह के आरोपों को या गलती स्‍वीकारने जैसी शर्त पर कोई बाध्‍यता नहीं रखी थी। दवा कंपनियां जुर्माने की रकम को अदा करने पर राजी होने के बाद कंपनियों को अन्‍य दर्ज मामलों को निपटाने का भी मौका मिल गया है।  विशेषज्ञों के हवाले से कहा है कि कंपनियों के जुर्माने की रकम को लेकर राजी होने के बाद देश भर में दर्ज अन्‍य मामलों के निपटारे को लेकर भी उनपर दबाव बनेगा। जानकार ये भी मानते हैं कि ऐसा करके दोनों ही पक्षों ने कई तरह के जोखिम और अनिश्‍चतता से खुद को बचा लिया है। कंपनियों के इस फैसले के साथ ही वजह सजा से भी बच गई हैं। गौरतलब है कि वर्ष 2017 में वेस्ट वर्जीनिया के बाद ओहायो में नशीली दवाओं के ओवरडोज से सबसे ज्‍यादा मौत हुई थीं। 

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