महामीडिया न्यूज सर्विस
अब किराने की दुकानों पर मिलेंगी सामान्य दवाएं

अब किराने की दुकानों पर मिलेंगी सामान्य दवाएं

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 14 दिन 2 घंटे पूर्व
29/10/2019
भोपाल [महामीडिया]अगर आपको बुखार है तो आपको पैरासिटामोल जैसी आम दवाई लेने के लिए भी दवा की दुकान में जाना पड़ता है। लेकिन जल्दी ही आपको पड़ोस की परचून की दुकान में यह दवा मिल जाएगी। सरकार इस तरह की योजना बना रही है। इन दवाओं के लेबल पर स्थानीय भाषाओं में खुराक और दुष्प्रभावों की जानकारी दी जाएगी। इससे ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में लोगों को मदद मिलने की उम्मीद है जहां दवा की दुकानें उपलब्ध नहीं हैं। एक सरकारी अधिकारी ने नाम न आने की शर्त पर कहा, 'पर्ची के बिना बिकने वाली आम दवाओं  के लिए औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन कानून में एक नई अनुसूची बनाई जा सकती है। इस तरह की दवाओं को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक उपलब्ध कराने की जरूरत है। इससे इलाज की लागत कम होगी।' उन्होंने कहा कि कई लोग डॉक्टर के पास जाने के बजाय खुद की दवा लेना पसंद करते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि डॉक्टर के पास जाना उन्हें महंगा पड़ता है। बुखार और दर्द में काम आने वाली पैरासिटामोल ओटीसी दवा है। अभी इस तरह की दवाओं के नियमन की कोई व्यवस्था नहीं है। इस तरह की आवश्यक दवाओं को आसानी से लोगों तक उपलब्ध कराना जरूरी है क्योंकि देश में 1,000 की आबादी पर एक से कम डॉक्टर है। साथ ही करीब 74 फीसदी डॉक्टर केवल एक तिहाई शहरी आबादी को सेवाएं दे रहे हैं। हालांकि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि इस बारे में नियम सख्त होने चाहिए ताकि इनका दुरुपयोग न हो। इसके दुरुपयोग या अत्यधिक इस्तेमाल मरीज का स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। अधिकारी ने कहा, 'ओटीसी दवाओं की कई श्रेणियां हो सकती हैं। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि वे किस रोग के इलाज में काम आती हैं और उनके साथ कितना जोखिम जुड़ा है।'ओटीसी दवाओं के नियमन के लिए नीति बनाने का काम करीब एक साल से चल रहा है। इस मुद्दे पर कई दवा कंपनियों के शीर्ष अधिकारी और ऑर्गनाइजेशन ऑफ फार्मास्यूटिकल प्रॉड्यूसर्स ऑफ इंडिया सरकार को सुझाव दे रहे हैं। ओपीपीआई ने अपने दस्तावेज 'शेपिंग इंडियाज ओटीसी पॉलिसी 2018' में कहा कि देश में ओटीसी दवाओं कई तरह की दवाएं शामिल हैं। इनमें व्यापक रूप से उपलब्ध और मशहूर ब्रांड वाली दवाएं, एच अनुसूची से बाहर की लेकिन बिना प्रचार वाली दवाएं मान्य ओटीसी आती हैं। साथ ही एच अनुसूची में शामिल ऐसी दवाएं भी इसके दायरे में हैं जिन्हें बार-बार खरीदने के लिए डॉक्टर की पर्ची की जरूरत नहीं पड़ती है। इन्हें पहली बार खरीदने पर ही डॉक्टर की पर्ची की जरूरत होती है और इनहें ओटीएक्स उत्पाद कहा जाता है। देश में ओटीसी का बाजार करीब 25,000 करोड़ रुपये का है जिसमें करीब 60 फीसदी हिस्सा मान्य ओटीसी का है। ओटीसी नीति का मसौदा तैयार करने में करीब से जुड़े एक दवा कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस व्यापक बाजार का विनियमन करने की जरूरत है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि आम लोगों को दवा उपलब्ध हो।  उन्होंने कहा, 'कई मामलों में इन दवाओं की कीमत कम है लेकिन वे दूरदराज के इलाकों में उपलब्ध नहीं हैं। अगर किराने की दुकान के जरिये इन्हें बेचा जाए और दिग्गज एफएमसीजी कंपनियां आपूर्ति शृंखला में शामिल होती हैं तो इन दवाओं को आसानी से देश के दूरदराज के क्षेत्रों में उपलब्ध कराया जा सकता है।' ओपीपीआई के मुताबिक औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन कानून,1940 और दवा एवं सौंदर्य प्रसाधन नियम, 1945 में ओटीसी दवाओं को परिभाषित किया गया है। एच, एच1 और एक्स अनुसूचियों में शामिल दवाओं को डॉक्टर की पर्ची के बिना नहीं बेचा जा सकता है।
और ख़बरें >

समाचार