महामीडिया न्यूज सर्विस
सोमवार को एकादशी होने पर शुभ कार्यों की होती है मनाही

सोमवार को एकादशी होने पर शुभ कार्यों की होती है मनाही

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 9 दिन 19 घंटे पूर्व
03/11/2019
भोपाल[ महामीडिया ]  सनातन संस्कृति के धर्मशास्त्रों में तिथि, व्रत और त्यौहारों का विशेष महत्व है। हर तिथि देवी-देवताओं को समर्पित है और इन तिथियों पर संबंधित देवी-देवता की उपासना से विशेष फल की प्राप्ति होती है। ऐसी ही एक विशेष तिथि है एकादशी तिथि। हर माह में दो एकादशी तिथि आती है। एक शुक्ल पक्ष की और दूसरी कृष्ण पक्ष की। दोनों ही एकादशी पर व्रत का विशेश महत्व है। एकादशी तिथि के व्रत के बारे में कहा जाता है कि इसका उपवास रखने के पापों का नाश होता है और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि अन्नदान, गौ दान, भूमि दान, स्वर्ण दान, कन्यादान के करने से जो फल प्राप्त होता है, ग्रहण के समय स्नान-दान और जप-तप करने से जो पुण्य मिलता है, कठोर तप, तीर्थाटन और अश्वमेध जैसे बड़े यज्ञ करने से जो फल मिलता है वह सिर्फ एकादशी का व्रत करने से मिल जाता है।शास्त्रोक्त और विज्ञान की मान्यता के अनुसार सूर्य से चन्द्रमा का अन्तर जब 121 डिग्री से 132 डिग्री तक होता है, तब शुक्ल पक्ष की एकादशी और जब सूर्य से चन्द्रमा का अन्तर 301 डिग्री से 312 डिग्री तक होता है तब कृष्ण पक्ष की एकादशी होती है। एकादशी तिथि के स्वामी विश्वेदेवा हैं। एकादशी का विशेष नाम नन्दा है और इसको ग्यारस भी कहा जाता है। एकादशी तिथि जब सोमवार को आती है तो क्रकच योग और दग्ध योग का निर्माण करती है, जो व्रत-उपवास जैसे कार्यों को छोड़कर बाकी शुभ कार्यों में निषेध है। शुक्रवार को एकादशी सिद्धिदा होती है, जबकि रविवार और मंगलवार को एकादशी मृत्युदा होती है। एकादशी की दिशा आग्नेय है। चन्द्रमा की इस ग्यारहवीं कला का अमृत उमा देवी के द्वारा पीया जाता है। भविष्य पुराण के अनुसार एकादशी तिथि को विश्वेदेवा की उपासना करने से सुख-संपत्ति, धन-धान्य और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
एकादश्यां यथोद्दिष्टा विश्वेदेवाः प्रपूजिताः।
प्रजां पशुं धनं धान्यं प्रयच्छन्ति महीं तथा।।

और ख़बरें >

समाचार