महामीडिया न्यूज सर्विस
कई इतिहासों से भरा है राज्यसभा

कई इतिहासों से भरा है राज्यसभा

admin | पोस्ट किया गया 24 दिन 22 घंटे पूर्व
18/11/2019
नई दिल्ली [महामीडिया] आज से शुरू हुए संसद के शीतकालीन सत्र के साथ ही राज्यसभा के 250वें सेशन भी हो गए हैं। इस मौके को विशेष बनाने की तैयारियां की गई हैं। इसी 250वें सत्र के पहले दिन राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना संबोधन देते हुए कहा कि राज्यसभा ने इतिहास बनाया भी और बनते हुए भी देखा है।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि, राज्य सभा के 250वें सत्र के दौरान मैं यहां उपस्थित सभी सांसदों को बधाई देता हूं। 250 सत्रों की ये जो यात्रा चली है, उसमें जिन-जिन सांसदों ने योगदान दिया है वो सभी अभिनंदन के अधिकारी हैं। मैं उनका आदरपूर्वक स्मरण करता हूं। समय बदलता गया, परिस्थितियां बदलती गई और इस सदन ने बदली हुई परिस्थितियों को आत्मसात करते हुए अपने को ढालने का प्रयास किया। आज से शुरू हुआ राज्यसभा का यह सत्र 250वां है। राज्यसभा ने इसे ऐतिहासिक बनाने की तैयारी कर रखी है। इसमें 250 रुपए का चांदी का सिक्का और डाक टिकट जारी किया जाएगा। राज्यसभा सचिवालय की ओर से बताया गया कि 250वें सत्र को ऐतिहासिक बनाने की पूरी तैयारी की गई है।सत्र की इस बैठक में "भारतीय राजनीति में राज्यसभा की भूमिका : सुधार की जरूरत" विषय पर विशेष चर्चा कराई जाएगी। राज्यसभा के चेयरमैन एम. वेंकैया नायडू ने सदन के 250वें सत्र की शुरुआत की पूर्वसंध्या पर रविवार को आयोजित सर्वदलीय बैठक में राज्यसभा का सफरनामा पुस्तिका का विमोचन किया।118 पेजों के राज्यसभा का सफरनामा में कुल 29 चैप्टर हैं, जिनमें कई तरह की संसदीय घटनाओं के रोचक आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं। सामाजिक बदलाव, आर्थिक सुधार, औद्योगिक विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, पर्यावरण, राष्ट्रीय सुरक्षा और 103 संवैधानिक सुधारों को इसमें शामिल किया गया है। सदन की प्रमुख उपलब्धियों में बताया गया कि 1952 से अब तक राज्यसभा की कुल 5466 बैठकें हो चुकी हैं, जिसमें 3817 विधेयक पारित किए गए। राज्यसभा ने समय-समय पर अपनी ताकत का अहसास भी कराया।इस दौरान राज्यसभा ने लोकसभा से पारित 120 विधेयकों को समुचित संशोधन के लिए वापस किया, जबकि पांच विधेयकों को रिजेक्ट कर दिया। सदन में कुल 2282 सदस्य निर्वाचित होकर पहुंचे, जिनमें 208 महिलाएं और 137 नामित होने वाले सदस्य भी शामिल हैं। संसद के इस उच्च सदन में 1952 में जहां 15 महिला सदस्य पहुंचीं, वहीं 2014 में यह संख्या बढ़कर 31 हो गई।
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