महामीडिया न्यूज सर्विस
भवानीप्रसाद मिश्र - एक राष्ट्रीय कवि

भवानीप्रसाद मिश्र - एक राष्ट्रीय कवि

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 762 दिन 16 घंटे पूर्व
18/08/2017
                भारतीय साहित्य जगत में कवि मनीषी भवानीप्रसाद मिश्र का एक महत्वपूर्ण स्थान रहा है मिश्र जी गूढ़ बातों को अत्यंत आसानी एवं सरलता के साथ अपनी रचना में प्रस्तुत करते थे आपकी लेखनी सेे अनेक कालजयी रचनाओं का सृजन हुआ तथा आपको साहित्य के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर के विभिन्न सम्मान प्राप्त हुए जिनमें सन् 1972 में बुनी हुई रस्सी के लिए साहित्य अकादमी पुरूस्कार, 1981-82 में उत्तरप्रदेश  हिन्दी संस्थान सम्मान एवं 1983 में मध्यप्रदेश  शासन के  शिखर  सम्मान प्रमुख हैं। 
मिश्रजी का जन्म मध्यप्रदेश के होषंगाबाद जिले के टिगरिया ग्राम में 29 मार्च 1913 में हुआ था एवं आपकी प्रारंभिक षिक्षा मध्यप्रदेश के होषंगाबाद, सोहागपुर नरसिंहपुर, जबलपुर आदि स्थानों पर हुई। मिश्रजी महात्मा गांधी के विचारों से अत्यंत प्रभावित थे जिसके फलस्वरूप 33 वर्ष की आयु से खादी के वस्त्र पहनने लगे थे। आपने 1930 से नियमित काव्य लेखन प्रारंभ किया तथा आगे जाकर कवि माखनलाल चतुर्वेदी के आग्रह से कर्मवीर में आपकी कविताएं प्रकाषित होने लगी। हंस, दूसरे सप्तक में लंबे समय तक प्रकाशित होते रहने सें आपके प्रकाशन का क्रम ज्यादा नियमित हो गया। मिश्रजी ने मद्रास एबीएम तथा मुंबई एवं दिल्ली आकाशवाणी में भी अपनी सेवाएं दी। 

देश की राजधानी दिल्ली में रहते हुए भी आपका मध्यप्रदेश से विशेष  लगाव रहा तथा विभिन्न कविसम्मेलनों एवं अन्य साहित्यिक कार्यक्रमों में अतिथि के तौर पर इंदौर, भोपाल, होषंगाबाद, इटारसी, सोहागपुर नरसिंहपुर, जबलपुर आदि शहरों में आपका आगमन होता रहता था। प्रदेश की जीवनरेखा पुण्य सलिला मां नर्मदा के किनारे स्थित होषंगाबाद नगर के प्रसिद्ध प्राचीन किले की क्षतिग्रस्त दीवार पर बैठकर उन्होंने सन्नाटा कविता की रचना की थी जो अत्यंत लोकप्रिय हुई एवं राष्ट्रिय स्तर पर सराही गई। विगत दिनों होषंगाबाद जिला प्रशासन  ने मिश्र की स्मृति में उसी खण्डहर प्राचीन किले के परिसर में भवानी पार्क विकसित कर सन्नाटा कविता का शिलालेख स्थापित किया है। 

समकालीन साहित्यकारों में भवानी भाई एवं मन्ना के नाम से प्रसिद्ध मिश्रजी की मध्यप्रदेश के प्रति आस्था एवं लगाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने मध्यप्रदेश की सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला में फैले सघन जंगलों पर एक कालजयी रचना सतपुड़ा के घने जंगल का सजृन किया जिसे आगे जाकर शासन ने स्कूल पाठ्यक्रम में शामिल किया। मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर में ही 20 फरवरी 1985 को मिश्रजी का देहावसान हुआ।  आप कवियों के कवि थे तथा आपकी कविताओं में नए भारत का स्वप्न झलकता था।
और ख़बरें >

समाचार

MAHA MEDIA NEWS SERVICES

Sarnath Complex 3rd Floor,
Front of Board Office, Shivaji Nagar, Bhopal
Madhya Pradesh, India

+91 755 4097200-16
Fax : +91 755 4000634

mmns.india@gmail.com
mmns.india@yahoo.in