महामीडिया न्यूज सर्विस
भारत के 10 राज्य और उनकी दुर्गा पूजा

भारत के 10 राज्य और उनकी दुर्गा पूजा

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 777 दिन 20 घंटे पूर्व
28/09/2017
 भारत के अलग-अलग राज्यों में नवरात्र के कार्यक्रम चल रहे हैं। यहां विभिन्न राज्यों में मां दुर्गा की पूजा करने की अलग-अलग तरह की परंपरा, रिवाज और प्रथा है।  
उत्तर प्रदेश, बिहार
यूपी और बिहार में दुर्गा पूजा मनाने के तरीकों में समानताएं हैं, क्योंकि वे पूजा के अंतिम दिन कन्याओं को खाना खिलाते हैं। यहां देवी स्थापना के साथ दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है। मंदिरों में देवी मां की झांकियां और पंडाल सजते हैं। आप यहां माता विंध्यवासिनी मंदिर विंध्याचल धाम, मिर्जापुर, वाराणसी में मां अन्नपूर्णा मंदिर और मां मुंडेश्वरी के मंदिर जा सकते हैं।
पश्चिम बंगाल, असम
पश्चिम बंगाल में दुर्गा, गणेश, कार्तिकेय, सरस्वती और लक्ष्मी की खूबसूरत मूर्तियों को स्थापित कर हर साल थीम बेस्ड भव्य पंडाल बनाए जाते हैं। पुरोहित चार दिनों तक धार्मिक ग्रंथ के अनुसार अनुष्ठान करते हैं। आप यहां गुवाहाटी में कामख्या देवी मंदिर, कोलकाता में दक्षिणेश्वर काली मंदिर जा सकते हैं।
तमिलनाडु
नवरात्र के आखरी तीन दिनों में तमिल लोग तीन देवी: दुर्गा, सरस्वती और लक्ष्मी की पूजा करते हैं। गोलू का अनुष्ठान दिलचस्प होता है। युवा लड़कियां और महिलाएं एक छोटे से लकड़ी के मंडप पर गुड़िया रखते हैं। आप यहां मरुपंधल देवी मंदिर में अरलावीमाओजी, थिरुक्रकदु देवी करुमुरियम मंदिर और श्री सूर्यमंगलम बागुलूमि देवी मंदिर जा सकते हैं।
महाराष्ट्र
यहां विवाहित महिलाएं एक-दूसरे के माथे पर हल्दी और कुमकुम लगाकर नवरात्र की शुभकामनाएं देती हैं। इस दौरान शुभ काम किए जाते हैं। इसके साथ ही गुजरात के गरबा की तरह महाराष्ट्र के लोग भी इन दिनों डांडिया खेलते हैं। यहां मुंबा देवी मंदिर, वज्रेश्वरी में वज्रेश्वरी देवी, मुंबई से 75 किलोमीटर दूर नासिक सप्तशृंगी में सप्तशृंगी देवी मंदिर के दर्शन कर सकते हैं।
गुजरात
गुजरात में श्रद्धालु उपवास रखकर और पारंपरिक नृत्य गरबा खेलकर नवरात्र मानते हैं। शाम की आरती जो कि गरभी के साथ की जाती है। गुजरात के मिट्टी के बर्तन और दीये देखने लायक होते हैं। आप यहां भावनगर में अम्बा देवी मंदिर जा सकते हैं।
पंजाब
पंजाब में भी देश के अन्य राज्यों की तरह नवरात्र का त्योहार मनाते हैं। यहां नौ दिन मंदिर में जागरण होते हैं। अमृतसर के बड़े हनुमान मंदिर में, जिन लोगों का संतान के रूप में पुत्र होने की मनोकामना पूरी होती है, वे अपने पुत्र को लंगूर के कपड़े पहनाकर मंदिर लाते हैं।
कर्नाटक
यहां दुष्ट दानव महिषासुरा पर मां दुर्गा की जीत को प्रदर्शित करने के लिए 17 वीं शताब्दी में विजयनगर वंश ने नवरात्र या नादहबाबा की परंपरा शुरू की थी। मैसूर पैलेस को विजय दशमी के दिन एक लाख से अधिक लाइट्स के साथ एक शाही दुल्हन की तरह सजाया जाता है। सड़कों पर जंबो सावरी नाम का भव्य दशहरा जुलूस निकलता है। गहनों से सजे हाथियों की सवारी देखने के लिए यहां आया जा सकता है।
छत्तीसगढ़
बस्तर के आदिवासी इस त्योहार को 75 दिन तक मनाते हैं। एक भारी रथ में आदिवासी देवी, देवी माओली और उनकी बहनों को जगदलपुर के दन्तेश्ववारी मंदिर में लाया जाता है। बस्तर और जगदलपुर के बीच जुलूस निकाला जाता है। इस 500 साल पुरानी परंपरा को बस्तर का दशहरा कहते हैं। यहां जगदलपुर में दन्तेश्वरी मंदिर, रायपुर में अंबा देवी और चंद्रपुर में चंद्रहसिनी देवी के दर्शन कर सकते हैं।
हिमाचल प्रदेश
हिमाचल कई देवी मंदिरों का गृह है, इसलिए यहां नवरात्र का बड़ा महत्व है। हिमाचल प्रदेश में नवरात्र उत्सव तब शुरू होता है जब बाकी देश में पूजा खत्म होने के करीब होती है। ब्यास नदी के तट पर लकड़ी और घास के टुकड़े को जलाने के साथ ये त्योहार खत्म होता है, जो रामायण में लंका के विनाश को दर्शाता है। कुल्लू घाटी के ढलपुर मैदान में नौ दिन के लंबे उत्सव को देखने यहां आ सकते हैं।
आंध्र प्रदेश
आंध्र प्रदेश में अविवाहित लड़कियां अपनी पसंद के पति या पत्नी के लिए सामुदायिक पूजा में शामिल होती हैं। इस रिवाज को ' बठुकम्मा पांडुगा' कहा जाता है। महिलाएं पूजा के लिए फूलों का ढेर बनाती हैं। उत्सव के आखिरी दिन इसे झील या नदी में डाल दिया जाता है। यहां सिम्हाचलम में वराहा लक्ष्मी नरसिम्हा मंदिर, विजयवाड़ा में कनाका दुर्गा मंदिर और लेपक्षी में श्री वीरभद्र मंदिर जा सकते हैं।
oooooooooo
नवरात्र का आठवां दिन: महागौरी की पूजा विधि और कन्या पूजन का लाभ 
नवरात्र के आठवें दिन माता आदि शक्ति के महागौरी स्वरूप की पूजा की जाती है। शिवपुराण के अनुसार, महागौरी को 8 साल की उम्र में ही अपने पूर्व जन्म की घटनाओं का आभास हो गया था। इसलिए उन्होंने 8 साल की उम्र से ही भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए तपस्या शुरू कर दी थी। इसलिए अष्टमी के दिन महागौरी का पूजन करने का विधान है। इस दिन मां की पूजा में दुर्गासप्तशती के मध्यम चरित्र का पाठ करना विशेष फलदायी होता है।
महागौरी का ध्यान मंत्र 
श्वेते वृषे समारुढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचिःमहागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा। महगौरी पूजन करते समय इस मंत्र से देवी का ध्यान करना चाहिए।मां महागौरी को शिवा भी कहा जाता है। इनके एक हाथ में दुर्गा शक्ति का प्रतीक त्रिशूल है तो दूसरे हाथ में भगवान शिव का प्रतीक डमरू है। अपने सांसारिक रूप में महागौरी उज्ज्वल, कोमल, श्वेत वर्णी तथा श्वेत वस्त्रधारी और चतुर्भुजा हैं। इनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में डमरू है तो तीसरा हाथ वरमुद्रा में हैं और चौथा हाथ एक गृहस्थ महिला की शक्ति को दर्शाता हुआ है। महागौरी को गायन और संगीत बहुत पसंद है। ये सफेद वृषभ यानी बैल पर सवार रहती हैं। इनके समस्त आभूषण आदि भी श्वेत हैं। महागौरी की उपासना से पूर्वसंचित पाप नष्ट हो जाते हैं। 
यह है पूजा विधि
मां शक्ति के इस स्वरूप की पूजा में नारियल, हलवा, पूड़ी और सब्जी का भोग लगाया जाता है। आज के दिन काले चने का प्रसाद विशेषरूप से बनाया जाता है। 
पूजन के बाद कुंवारी कन्याओं को भोजन कराने और उनका पूजन करने से मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है। महागौरी माता अन्नपूर्णा स्वरूप भी हैं। इसलिए कन्याओं को भोजन कराने और उनका पूजन-सम्मान करने से धन, वैभव और सुख-शांति की प्राप्ति होती है।
महागौरी की पूजा करते समय जहां तक हो सके गुलाबी रंग के वस्त्र पहनने चाहिए। महागौरी गृहस्थ आश्रम की देवी हैं और गुलाबी रंग प्रेम का प्रतीक है। एक परिवार को प्रेम के धागों से ही गूथकर रखा जा सकते हैं, इसलिए आज के दिन गुलाबी रंग पहनना शुभ रहता है।

और ख़बरें >

समाचार

MAHA MEDIA NEWS SERVICES

Sarnath Complex 3rd Floor,
Front of Board Office, Shivaji Nagar, Bhopal
Madhya Pradesh, India

+91 755 4097200-16
Fax : +91 755 4000634

mmns.india@gmail.com
mmns.india@yahoo.in