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शरदपूर्णिमा पर रातभर बरसा अमृत

शरदपूर्णिमा पर रातभर बरसा अमृत

admin | पोस्ट किया गया 769 दिन 20 घंटे पूर्व
06/10/2017
भोपाल [महामीडिया]: शरद पूर्णिमा का पर्व मां लक्ष्मी की विधि विधान से पूजा अर्चना कर बड़े ही श्रृद्धा पूर्वक मनाया गया। इस दिन महिलाओं ने मां लक्ष्मी की पूजा कर संतान के अभय सुख समृद्धि की कामना की।

शरद पूर्णिमा का त्यौहार हिंदू पचांग के अनुसार आश्विन मास की पूर्णिमा के दिन महिलाओं द्वारा मां लक्ष्मी की पूजा अर्चना कर धन वैभव प्राप्ति की कामना की गई। एक किवदंती के अनुसार प्राचीनकाल में एक राजा की दो पु़ित्रयां थी। जो शरद पूणिमा का व्रत रखती थी। जिसमें राजा की छोटी पुत्री द्वारा उक्त व्रत पूर्ण विधि विधान से नही किया गया। जिसके फल स्वरूप उसकी संतानें जीवित नही रहती थी। जब उसने विद्वानों की सलाह पर विधि विधान पूर्वक शरद पूणिमा का व्रत किया तो उसे पुत्ररत्न की प्राप्ति हुई। तभी से महिलाओं द्वारा संतान के अभय के लिए उक्त व्रत को रखा जाता है।

माना जाता है कि शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी अपने हाथों में वर और अभय लिए घूमती है। इस दिन वह अपने जागते हुए अपने भक्तों को धन, वैभव, अभय का आशीष देती है। इस दिन महिलाओं द्वारा चंद्रोदय होने पर मिट्टी के दीपक जलाए गए। इसके साथ ही घी चीनी से बनी खीर चंद्रमा की चांदनी में रखी गई। एक पहर बीतने पर उक्त खीर का भोग महिलाओं द्वारा पूर्ण श्रद्धा भाव के साथ मां लक्ष्मी को अर्पित किया गया।

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