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छठ पूजा का बढ़ता रूप

छठ पूजा का बढ़ता रूप

admin | पोस्ट किया गया 723 दिन 15 घंटे पूर्व
23/10/2017
भोपाल (महामीडिया) धर्मेन्द्र सिंह ठाकुर महापर्व छठ पूजा की धूम मंगलवार से आरंभ हो रही है। कुछ सालों पूर्व तक छठ पूजा का महत्व बिहार और उत्तरप्रदेश तक सीमित था लेकिन अब यह त्यौहार पूरे देशभर में बढ़ी धूमधाम के साथ मनाया जाने लगा है। विधि विधान से मनाया जाने वाले इस त्यौहार की सबसे बड़ी विशेषता उभर कर सामने आई है वह है हिन्दुओं की एकता। निश्चित रूप से दिपावली, होली, रक्षाबंधन के मुकाबले छठपूजा सबसे ज्यादा मिल जुलकर मनाई जाने लगी है। त्यौहार की भव्यता अथवा विशालता का इससे पता चलता है कि रेल्वे को सालभर में सबसे ज्यादा अतिरिक्त रेलें इस समय ही चलाना पड़ती है। देशभर में रहने वाले बिहारी लोग और भोजपुरी लोग चार दिन के इस त्यौहार को मनाने के लिए अपने घर लौटते हैं।
छठ पूजा का सबसे बड़ी पूजा बिहार के ओरंगाबाद जिले में स्थित 8वीं सदी मे बने देव सूर्य मंदिर में होती है। यहां पर हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं इस बार का अनुमान है कि लगभग 1 लाख श्रद्धालु यहां पहुंचेंगे। चार दिन चलने वाले छठ उत्सव में यह लोग सूर्य अराधना और अर्ध्य देने के बाद नदी में डूबकी लगाएंगे। हिन्दू धर्म में भगवान सूर्य देव मंदिर का बहुत महत्व है। माना जाता है कि मंदिर को स्वयं भगवान विश्वकर्मा ने बनवाया था। ये मंदिर 8वीं सदी यानि डेढ़ लाख साल से भी पुराना है। इस मंदिर का एतिहासिक महत्व के साथ-साथ इसकी सुंदरता सारे विश्व में विख्यात है। इसे काले पत्थरों को तराशकर शानदार शिल्प से इस मंदिर को बनवाया गया है। पूजा के महत्व के बारे में कहा जाता है कि देवासुर लड़ाई में जब देवता हार गए तो देव माता अदिति ने पुत्र प्राप्ति के लिए देव के जंगलों में मैया छठ की पूजा-अर्चना की थी। इस पूजा से खुश होकर छठी मैया ने अदिति को पुत्र का प्रसाद दिया और उसके बाद छठी मैया की देन से इस पुत्र ने सभी देवासुरों को पराजित कर देवताओं को विजय दिलाई। तभी से मान्यता चली आ रही है कि छठ मैया की पूजा अर्चना करने से सभी दुखों का निवारण होता है। इस बार छठ पर्व 24 अक्टूबर से आरंभ होगा। इस दिन नहाय खाये, की अराधना होगी। 25 अक्टूबर को खरा और 26 अक्टूबर को सांझ का अर्ध्य और 27 अक्टूबर को भौर का अर्ध्य लगाया जाएगा।
बिहार में देओ (ओरंगाबाद) के बाद राजधानी पटना के कालीघाट, मुंगेर के कष्टहरवी घाट और हाजीपुर के कौन हारा घाट पर लाखों की संख्या में पूजा-अर्चना करते हैं। इसके अलावा देश के अन्य राज्यों में श्रद्धालु नदी, तालाबों में पूजा करते हैं तो वहीं मुम्बई, चैन्नई, कन्याकुमारी, द्वारका, उड़ीसा, कोलकाता में समुद्र के समक्ष पूजा-अर्चना होती है।

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