महामीडिया न्यूज सर्विस
गुरूपर्व पर स्वर्ण मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़

गुरूपर्व पर स्वर्ण मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़

admin | पोस्ट किया गया 748 दिन 10 घंटे पूर्व
04/11/2017
नई दिल्ली (महामीडिया) गुरु नानक जयंती को गुरु नानक पर्व और प्रकाश उत्सव के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन सिख धर्म के सबसे पहले गुरु का जन्म हुआ था। हिंदू पंचाग के अनुसार कार्तिक माह की पूर्णिमा के दिन ये पर्व मनाया जाता है। गुरु नानक जी ने ही सिख समुदाय की स्थापना की थी। उनके जन्मदिन को सभी सिख लोग धूमधाम से मनाते हैं। इस दिन गुरुद्वारे में भव्य लंगर का आयोजन किया जाता है। गुरु नानक जी का जन्म 548 वर्ष पहले 15 अप्रैल 1469 में तलवंडी में हुआ था। इस स्थान को ननकाना साहिब के नाम से जाना जाता है। ये स्थान पाकिस्तान में है। ये सिख धर्म का सबसे महत्वपूर्ण पर्व है। इस पर्व की शुरुआत दो दिन पहले से ही गुरु ग्रंथ साहिब के पाठ से शुरु हो जाती है। 48 घंटे तक चलने वाले इस पाठ को अखंड पाठ कहा जाता है। गुरु पर्व से तीन सप्ताह पहले से सिख धर्म के लोग भजन कीर्तन करते हुए प्रभात फेरी निकालते हैं। गुरु पर्व के अवसर पर धर्म ग्रंथों को सजाया जाता है और उनका शब्द कीर्तन किया जाता है। इसके साथ निशान साहिब व पंच प्यारों की झाकियां निकाली जाती हैं, इसमें वो सिख धर्म के झंडे लिए होते हैं और गुरु ग्रंथ साहिब को पालकी में लेकर चला जाता है। इसे नगर कीर्तन के नाम से जाना जाता है। इस नगर कीर्तन में गायक होते हैं जो गुरु नानक साहिब के उपदेश गाते हुए पंच प्यारों के पीछे चलते हैं। कई जगह इन नगरकीर्तनों में बैंड आदि भी चलता है और सिख धर्म के अनुयायी अपनी तलवार या कृपाल से कलाकारी दिखाते हुए चलते हैं। इन नगर कीर्तनों में अनुयायी अपने सिख गुरु के उपदेश बताते हुए चलते हैं और इसी तरह श्रद्धालु इसमें जुड़ते चलते हैं।सिखों के लिए कितना मायने रखता है गुरु पर्व।
और ख़बरें >

समाचार