महामीडिया न्यूज सर्विस
राजस्थान में इलाज न मिलने से अब तक करीब 25 मौतें

राजस्थान में इलाज न मिलने से अब तक करीब 25 मौतें

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 652 दिन 4 घंटे पूर्व
11/11/2017
जयपुर (महामीडिया) लगातार पांच दिनों से राज्यभर में नौ हजार से ज्यादा सेवारत डॉक्टर सामूहिक छुट्‌टी पर हैं। इलाज न मिलने से प्रदेशभर में मरीजों की मौतें हो रही हैं। हालात मेडिकल इमरजेंसी के हैं। अब तक करीब 25 मौतें हो चुकी हैं। रोज डेढ़ सौ से 200 ऑपरेशन टाले जा रहे हैं। गंगानगर में सेना के डॉक्टरों को अस्पताल में लगाया गया है। सबसे बुरे हालात गांवों के हैं। हजारों मरीजों को शहर भागना पड़ रहा है। सरकार ने आंदोलन कर रहे डॉक्टरों की गिरफ्तारी के आदेश दे दिए हैं। रेस्मा के तहत डॉक्टरों की धरपकड़ की जा रही है। शुक्रवार रात तक 12 से ज्यादा डॉक्टरों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। अधिकतर डॉक्टर नेता भूमिगत हो चुके हैं। रेस्मा में पहली गिरफ्तारी जयपुर से डॉक्टर संघ की वार्ता के संयोजक डॉ. जगदीश मोदी की हुई। हालांकि,उन्हें शाम तक छोड़ दिया गया। वहीं, सरकार भी अब डॉक्टरों पर कार्रवाई के मूड में दिख रही है। इससे पूर्व, चिकित्सा मंत्री ने डॉक्टरों को काम पर लौट आने के लिए शुक्रवार शाम सात बजे तक का अल्टीमेटम दिया। मंत्री कालीचरण सराफ ने कहा है कि सरकार दबाव में नहीं आएगी। जितने डॉक्टर चाहें, हड़ताल पर चले जाएं। सरकार अब वार्ता की पहल नहीं करेगी। डॉक्टर चाहें तो वार्ता के दरवाजे खुले हैं। मंत्री ने दावा किया-शुक्रवार को 60% डॉक्टर काम पर लौट आए। वहीं डॉक्टर संघ का कहना है कि 99% डॉक्टर छुट्टी पर है। सरकार ने रेजीडेंट्स और सेवारत चिकित्सकों को सार्वजनिक नोटिस के जरिए तुरंत काम पर लौटने को कहा है। हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह डॉक्टरों को तुरंत काम पर लौटने के लिए व्यक्तिगत नोटिस जारी करे। कोर्ट ने सरकार से 15 नवंबर तक हड़ताली डॉक्टरों की सूची और उनके वेतन-भत्तोंं और सुविधाओं की जानकारी मांगी है। अदालत ने सरकार से पूछा है कि उसने हड़ताली डॉक्टर्स के खिलाफ पूर्व में दिए गए आदेश के पालन में क्या कार्रवाई की। कोर्ट ने यह अंतरिम निर्देश शुक्रवार को महेश शर्मा, डॉ. अभिनव शर्मा की याचिकाओं पर दिए। अदालत ने सरकार से कहा जो मांगें मानने योग्य हैं उन्हें तुरंत माने और हड़ताल के मामले में 2011 में दिए आदेश का पालन करवाए। अदालत ने कहा कि एसएमएस में हर डॉक्टर को एक दिन में 800 मरीज देखने होते हैं और उन पर वर्कलोड है, ऐसे में डाक्टर्स क्या करें। जवाब में प्रार्थी अभिनव शर्मा ने कहा कि वर्कलोड तो राज्य की पुलिस और इंडियन आर्मी पर भी है तो क्या उन्हें भी वर्कलोड के कारण हड़ताल पर चले जाना चाहिए।

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