महामीडिया न्यूज सर्विस
लालू गये जेल

लालू गये जेल

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 665 दिन 9 घंटे पूर्व
23/12/2017
भोपाल (महामीडिया) धर्मेन्द्र सिंह ठाकुर आखिरकार बिहार के बहुचर्चित चारा घोटाले में लालू प्रसाद यादव दोषी करार दे दिए गए। लालू को तुरंत जेल पहुंचा दिया गया। सजा कितनी होगी इसका फैसला कोर्ट तीन जनवरी को करेगा। इस घोटाले में कुछ आरोपी बच गए तो कहीं अधिक बच नहीं पाए। यह  बिहार प्रान्त का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार घोटाला था जिसमें पशुओं को खिलाये जाने वाले चारे के नाम पर 950 करोड़ रुपये सरकारी खजाने से फर्जीवाड़ा करके निकाल लिये गये। सरकारी खजाने की इस चोरी में अन्य कई लोगों के अलावा बिहार के तत्कालीन मुख्यमन्त्री लालू प्रसाद यादव व पूर्व मुख्यमन्त्री जगन्नाथ मिश्र पर भी आरोप लगाi इस घोटाले के कारण लालू यादव को मुख्यमन्त्री के पद से त्याग पत्र देना पड़ा। लेकिन राजनीति के माहिर खिलाड़ी लालू ने अपनी जगह अपनी बीबी राबड़ी देवी को कुर्सी सौंप कर स्वयं ही सबसे बड़ा सबूत पेश कर दिया कि भैंस उनके आगे क्या चीज है वह चारा खाकर सिर्फ़ दूध ही तो देती परन्तु वह दूध की जगह बिहार की जनता को राबड़ी देकर जा रहे हैं। लोकसभा में प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी द्वारा इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया गया और सीबीआई जाँच की माँग की गयी। सत्तारुढ़ पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस व उसकी सहयोगी जनता दल जैसी दो-दो दिग्गज पार्टियों के नेताओं और नौकरशाही की मिलीभगत से की गयी सरकारी खजाने की इस चोरी की गूँज न सिर्फ़ भारत में बल्कि सात समुन्दर पार अमेरिका और ब्रिटेन में भी सुनायी दी जिससे भारत की राजनीति बदनाम हुई। हालांकि यह घोटाला 1996 में हुआ था लेकिन जैसे-जैसे जाँच हुई इसकी पर्तें खुलती गयीं और लालू यादव व जगन्नाथ मिश्र जैसे कई सफेदपोश नेता इसमें शामिल नजर आये। मामला लगभग दो दशक तक चला। मीडिया ने भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभायी जिसके चलते सीबीआई और न्यायपालिका अपनी-अपनी कार्रवाई में कोई कोताही नहीं कर पायी। इससे यह भी साफ हो गया कि इस देश को नेता नहीं बल्कि माफिया चला रहे हैं जिन्होंने इसकी अर्थव्यवस्था को चौपट कर दिया है। न्यायालय ने चारा घोटाले में लालू यादव को दोषी घोषित किया। उनकी लोकसभा की सदस्यता छीन ली गयी और ११ वर्ष तक कोई चुनाव लड़ने पर प्रतिबन्ध लगा दिय गया। लालू प्रसाद यादव और जदयू नेता जगदीश शर्मा को घोटाला मामले में दोषी करार दिये जाने के बाद लोक सभा से अयोग्य ठहराया गया। चुनाव आयोग के नये नियमों के अनुसार लालू प्रसाद अब 11 साल तक लोक सभा चुनाव नहीं लड़ पायेंगे। उच्चतम न्यायालय ने चारा घोटाला में दोषी सांसदों को संसद की सदस्यता से अयोग्य ठहराये जाने से बचाने वाले प्रावधान को भी निरस्त कर दिया है। लोक सभा के महासचिव एस० बालशेखर ने यादव और शर्मा को सदन की सदस्यता के अयोग्य ठहराये जाने की अधिसूचना जारी कर दी। लोक सभा द्वारा जारी इस अधिसूचना के बाद संसद की सदस्यता गँवाने वाले लालू प्रसाद यादव भारतीय इतिहास में लोक सभा के पहले सांसद हैं और जनता दल यूनाइटेड के एक अन्य नेता जगदीश शर्मा दूसरे, जिन्हें 10 साल के लिये अयोग्य ठहराया गया। इसे पशुपालन घोटाला ही कहा जाना चाहिए क्योंकि मामला सिर्फ़ चारे का नहीं है। असल में यह सारा घपला बिहार सरकार के ख़ज़ाने से ग़लत ढँग से पैसे निकालने का है। कई वर्षों में करोड़ों की रक़म पशुपालन विभाग के अधिकारियों और ठेकेदारों ने राजनीतिक मिली-भगत के साथ निकाली है।
घपला रोशनी में धीरे-धीरे आया और जाँच के बाद पता चला कि ये सिलसिला वर्षों से चल रहा था। शुरुआत छोटे-मोटे मामलों से हुई लेकिन बात बढ़ते-बढ़ते तत्कालीन मुख्यमन्त्री लालू प्रसाद यादव व नीतीश कुमारतक जा पहुँची। इस घोटाले के आरोपी एस०बी० सिन्हा के बयान के अनुसार चारा घोटाले का पैसा बिहार के मुख्यमन्त्री नीतीश कुमार को भी मिला था। ए०के० झा ने सीबीआई के विशेष न्यायाधीश आर०आर० त्रिपाठी की अदालत में बताया कि घोटाले के आरोपी एस०बी० सिन्हा से बयान लिया गया था। इसी बयान में इसकी पुष्टि हुई है। एस०बी० सिन्हा ने बताया था कि 1995 के लोकसभा चुनाव में चारा घोटाले के आरोपी विजय कुमार मल्लिक द्वारा एक करोड़ रुपये नीतीश कुमार को भिजवाया गया। यह पैसा उन्हें दिल्ली के एक होटल में दिया गया। नीतीश ने पैसे लेकर धन्यवाद भी कहा। कुछ दिनों बाद फिर घोटाले के आरोपी एस०बी० सिन्हा ने नौकर महेन्द्र प्रसाद के हाथ 10 लाख रुपये पटना में विधायक सुधा श्रीवास्तव के घर पर नीतीश कुमार के लिये भेजे थे। घोटाले के आरोपी आर०के० दास ने भी कोर्ट में दिये बयान में बताया था कि उसने पाँच लाख रुपये नीतीश कुमार को दिये हैं। नीतीश कुमार 1995 में समता पार्टी के नेता थे। वह एस०बी० सिन्हा को कहते थे कि पैसा नहीं देने पर मामला उजागर कर दिया जायेगा। तत्कालीन विधायक शिवानन्द तिवारी, राधाकान्त झा, रामदास एवं गुलशन अजमानी को भी पैसा देने की बात सामने आयी। मामला एक-दो करोड़ रुपए से शुरू होकर 950 करोड़ रुपए तक जा पहुँचा। परन्तु कोई पक्के तौर पर नहीं कह सकता कि घपला कितनी रक़म का है? क्योंकि यह वर्षों से होता रहा है और बिहार में हिसाब रखने में भी भारी गड़बड़ियाँ हुईं। मामले के जाल में फँसे लालू यादव को इस सिलसिले में जेल जाना पड़ा, उनके ख़िलाफ़ सीबीआई और आयकर की जाँच हुई, छापे पड़े और अब भी वे कई मुक़दमों का सामना कर रहे हैं। आय से अधिक सम्पत्ति के एक मामले में सीबीआई ने राबड़ी देवी को भी अभियुक्त बनाया है।
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