महामीडिया न्यूज सर्विस
जनजातियों के लिए स्वास्थ्य का प्रबंध

जनजातियों के लिए स्वास्थ्य का प्रबंध

admin | पोस्ट किया गया 659 दिन 5 घंटे पूर्व
24/12/2017
भोपाल (महामीडिया) राजकुमार शर्मा लोगों को क्षमतावान बनाकर लंबे अर्से तक इस उत्तरदायित्व का बेहतर ढंग से निर्वहन हो सकेगा। दूसरे शब्दों में कहें, तो स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के स्थान पर स्वास्थ्य सेवा के लिए क्षमता निर्माण की नीति बनाई जानी चाहिए। यह सिद्धांत स्वास्थ्य सेवा के लिए क्षमता निर्माण की नीति बनाई जानी चाहिए। यह सिद्धांत स्वास्थ्य सेवा के नियोजन में मार्गदर्शन करेगा- विशेषकर इस बात का चयन करने में कि कौन, कहां कब और कैसे स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराएगा। सदियों के वैज्ञानिक ज्ञान के अंतर को पाटने के लिए अनुसूचित क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं को लोक मीडिया, आधुनिक मीडिया और स्कूल पाठ्यक्रम जैसी सामूहिक शिक्षा पद्धतियों के माध्यम से स्वास्थ्य साक्षरता फैलाने को सर्वाधिक महत्व प्रदान करना चाहिए। स्थानीय बोलियों में संचार और प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। बड़ी तादाद में अनुसूचित जनजाति के बच्चे और युवा वर्तमान में स्कूलों में जा रहे हैं। यह स्वास्थ्य में सुधार लाने तथा स्वास्थ्य से संबंधित ज्ञान और पद्धतियां प्रदान करने, दोनों के अपार अवसर उपलबध कराता है। प्राथमिक विद्यालयों, माध्यमिक विद्यालयों, उच्च विद्यालयों, आश्रम शालाओं सहित स्कूलों और आंगनबाड़ियों को प्राथमिक स्वास्थ्य ज्ञान केंद्र बनना चाहिए। परंपरागत हकीम और दाईंया स्वदेशी स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्हें अलग-थलग करने अथवा खारिज करने की जगह, उन्हें स्वास्थ्य सेवा के साथ जोड़ने या उनका सहयोग लेने जैसे संवेदनशील तरीके की संभावनाएं अवश्य तलाशी जानी चाहिए। भौतिक दूरी के अलावा, विशाल सांस्कृतिक अंतर, जनजातीय आबादी को दूसरों से अलग करता हैं। इस अंतर को मिटाने के लिए अनुसूचित जनजातियों की आबादी तक स्वास्थ्य सेवाएं सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील ढंग से स्थानीय भाषा में पहुंचानी चाहिए। अनुसूचित क्षेत्रों के लिए स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने की प्रणाली को इस चीनी सूक्ति को अपना मार्गदर्शक सिद्धांत मानना चाहिए। मां अपने बीमार शिशु को उठाकर कितनी दूरी तक पैदल चल सकती है? स्वास्थ्य सेवा उसी दायरे में उपलब्ध होनी चाहिए। यह जंगलों में रहने वाले जनजातीय समुदायों के लिए है, इसका आश्रय है कि स्वास्थ्य सेवा आवश्यक रूप से उनके गांव/टोले में उपलब्ध होनी चाहिए। साठ वर्षों की नाकामी से हमें यह सबक लेना चाहिए कि बाहर से स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना व्यवहार्य समाधान नहीं है। अनुसूचित क्षेत्रों स्वास्थ्य सेवा की अभिकल्पना ऐसी होनी चाहिए कि स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाली और निवारक तथा ज्यदातर उपचारात्मक सेवाएं गांव या टोले में ही सृजित की जाएं और वहीं मुहैया कराई जाएं। नशे की लत अनुसूचित जनजाति की आबादी से बहुत कुछ छीन लेती है। इससे सिर्फ सेहत पर ही नहीं, बल्कि उत्पादकता, परिवार की आर्थिक स्थिति, सामाजिक सद्भाव और अंततः विकास पर भी असर पड़ता है। इसलिए गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 1976 में मंजूर और राज्यों द्वारा स्वीकृत अनुसूचित क्षेत्रों के लिए आबकारी नीति कारगर ढंग से लागू की जानी चाहिए।  इतना ही नहीं, तंबाकू और मादक पदार्थों की उपलब्धता और इस्तेमाल पर सख्ती से नियंत्रण होना चाहिए। ये प्रयास जनजातीय उप योजना का महत्वपूर्ण अंग बनाए जाने चाहिए। अनुसूचित जनजातियों की आबादी में शराब और तंबाकू उत्पादों की उपलब्धता और इस्तेमाल तथा राज्यों द्वारा नियंत्रण नीतियों के कार्यान्वयन की चुनिंदा संकेतकों के आधार पर निगरानी होनी चाहिए। जनजातिय उप योजना बजट, अनुसूचित जनजातियों की आबादी के अनुपात में अलग से मिलना चाहिए, यह अनुसूचित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की सामान्य गतिविधियों के लिए मिलने वाले नियमित बजट का विकल्प नहीं होना चाहिए। कुल टीएसपी बजट का कम से कम 15 प्रतिशत, अनुसूचित क्षेत्रों में जनजातीय स्वास्थ्य योजना के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए समर्पित होना चाहिए। यह इन क्षेत्रों में सामान्य गतिविधियों के लिए मिलने वाले नियमित स्वास्थ्य बजट के अतिरिक्त होना चाहिए। अनुसूचित जनजातियों की आबादी से संबंधित आंकड़े अनुसूचित क्षेत्रों में नियोजन, स्वास्थ्य कार्यक्रमों की निगरानी और मूल्यांकन का बुनियादी संघटक हैं। समस्त राष्ट्रीय आंकड़ा प्रणालियों-जनगणना एसआरएस, एनएफएचएस, एनएसएसओ, डीएलएचएस से विशेष तौर पर अनुसूचित जनजातियों के लिए जिला और उससे ऊपरी स्तर पर विषिष्ट स्वास्थ्य संकेतकों के बारे में विशिष्ट अनुमान सृजित करने को कहा जाना चाहिए। अनुसूचित जनजातियों की आबादी से संबंधित कुल बजट के एक प्रतिशत का आवंटन स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर अनुसूचित आबादी के बारे में विश्वसनीय, समयबद्ध, उपयुक्त, पृथक आंकड़े तैयार करने के लिए किया जाना चाहिए। यह कार्यक्रम प्रबंधकों, नीति निर्धारकों और अनुसूचित जाति की आबादी का मार्गदर्शन करने के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण साधन उपलब्ध कराएगा। जनजातिय स्वास्थ्य एवं स्वास्थ्य सेवा की वर्तमान स्थित से असंतुष्ट स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और जनजातीय मंत्रालय, भारत सरकार ने संयुक्त रूप से जनजातीय स्वास्थ्य पर एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। इस समिति को जनजातीय लोगों के स्वास्थ सेवाओं की स्थिति की समीक्षा करने और जनजातीय क्षेत्रों में जिला स्वास्थ्य योजना का प्रारूप तैयार करने सहित सुधारात्मक समाधनों का सुझाव देने का दायित्व सौंपा गया है। विशेषज्ञ समिति वर्तमान स्थिति की समीक्षा कर चुकी है और मुमकिन संसाधनों की संभावनाएं तलाश रही है। हाल ही में एसईएआरसीएच, गढ़चिरौली में जनजातीय स्वास्थ्य सेवा में बेहतरीन पद्धतियों पर एक राष्ट्रय कार्यशाला का आयोजन किया गया-देश में ऐसा संभवतः पहली बार किया गया। इसमें 23 बहतरीन पद्धतियां प्रस्तुत की गईं और उन पर चर्चा हुई। हमें इस विशेषज्ञ समूह की रिपोर्ट की प्रतीक्षा करनी चाहिए। आशा है कि यह आगे की राह दिखाएगी। 


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