महामीडिया न्यूज सर्विस
स्वयं के अस्तित्व को कायम रखने का उपाय है एकात्म यात्रा

स्वयं के अस्तित्व को कायम रखने का उपाय है एकात्म यात्रा

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 651 दिन 17 घंटे पूर्व
09/01/2018
भोपाल (महामीडिया)  भेद भाषाओं में होता है, अनुवादकों में होता है, संस्कृतियों में होता है, परम्पराओं में होता है, सिद्धांतों में होता है, लेकिन सत्य में नहीं। यही सृष्टि के सृजन का मूल तत्व है। वेद कहते हैं ईश्वर अजन्मा है। उसे जन्म लेने की आवश्यकता नहीं, उसने कभी जन्म नहीं लिया और वह कभी जन्म नहीं लेगा। ईश्वर तो एक ही है लेकिन देवी-देवता या भगवान अनेक हैं। उस एक को छोड़कर उक्त अनेक के आधार पर नियम, पूजा, तीर्थ आदि कर्मकांड सभी स्थूल तत्व नहीं हैं ये सब अपनी मन की तृष्णा को पूर्ति देने वाले साधन मात्र है। यही सनातन सत्य है। इस बात को आज गंभीरता से समझने की आवश्यकता है। हमें समझना होगा कि जगत भ्रमपूर्ण है, ब्रम्हा और मोझ ही सत्य है। वर्तमान स्थित पर नजर डालें तो स्थिति इसके विपरीत है। धर्म सत्तापाने का साधन और भ्रमवादी परंपराये मानव को गर्त में ले जाने वाली होती दिखती हैं। प्रकृति के प्रति असंवेदनषीलता से नदियां, तालाब, कुए, बावडिया, झरने अपना मूल रूप खोते जा रहे है। इस बीच आदि गुरू शंकराचार्य की एकात्म यात्रा ने जीव मात्र को सचेत करने का संदेष दिया है। यह अलग बात है कि हर मानव अपने विवेक अनुसार इसे अलग-अलग रूपों में दृष्टिगत रखते हुए कई मायने निकाल रहा है लेकिन जो भी हो आम मानव को समझना होगा कि सनातन धर्म ही इस जीव जगत का सत्य है, और इसे बचाने अगर कोई दष्मन भी पहल करे तो हमें सहयोग करना चाहिए। 
सत्यम शिवम सुंदरम : सत्य ही शिव हैे और शिव ही सुन्दर है। जब जब इस संसार में धर्म की हानी हुई है ब्रम्हा ने मानव रूप में जन्म लिया है। पर हम लोगों ने ब्रम्हा के उस अवतरण मूल हो छोड़ उन्हें ही अपने कर्मकाण्ड और धन आपूर्ति जीवन अर्जन का साधन बना लिया। यहां हमें समझना होगा कि जीवन का पथ सनातन है। समस्त देवता और मनुष्य इसी मार्ग से पैदा हुए हैं तथा प्रगति की है। हे मनुष्यों आप अपने उत्पन्न होने की आधाररूपा अपनी माता को विनष्ट न करें। अर्थात किसी की आत्मा को दुखाकर प्रगति को मार्ग प्रशस्त न करें। 
क्या है सनातन धर्म : सनातन का अर्थ है जो शाश्वत हो, सदा के लिए सत्य हो। जिन बातों का शाश्वत महत्व हो वही सनातन कही गई है। जैसे सत्य सनातन है। ईश्वर ही सत्य है, आत्मा ही सत्य है, मोक्ष ही सत्य है और इस सत्य के मार्ग को बताने वाला धर्म ही सनातन धर्म भी सत्य है। वह सत्य जो अनादि काल से चला आ रहा है और जिसका कभी भी अंत नहीं होगा वह ही सनातन या शाश्वत है। जिनका न प्रारंभ है और जिनका न अंत है उस सत्य को ही सनातन कहते हैं। यही सनातन धर्म का सत्य है। सनातन धर्म ही जीवन को सत्तमार्ग पर रखते हुए संतुलित जीवन जीने की कला सीखाता है।
और ख़बरें >

समाचार

MAHA MEDIA NEWS SERVICES

Sarnath Complex 3rd Floor,
Front of Board Office, Shivaji Nagar, Bhopal
Madhya Pradesh, India

+91 755 4097200-16
Fax : +91 755 4000634

mmns.india@gmail.com
mmns.india@yahoo.in