महामीडिया न्यूज सर्विस
प्यूरीफायर से ज्यादा 'शुद्ध' है नल का पानी

प्यूरीफायर से ज्यादा 'शुद्ध' है नल का पानी

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 614 दिन 6 घंटे पूर्व
07/02/2018
लंदन (महामीडिया)  इन दिनों बाजार में कई किस्म के वॉटर प्यूपीफायर मौजूद हैं जो पानी के सबसे शु्द्ध बानने का दावा करते हैं। इसके साथ ही ये प्यूरीफायर कंपनियां इस बात का भी दावा करती हैं कि उनकी मशीन का पानी आपकी सेहत को बेहतर बनाता है। लेकिन क्या ये वाकई सच है? एक्सपर्ट्स का कहना है कि हाई टेक वॉटर प्यूरीफायर मशीनों का असल में कोई प्रभाव नहीं पड़ता। पानी को शुद्ध बनाने वाली मशीनों का सेहत पर कोई खास असर नहीं होता है। बल्कि ऐसा देखा गया है कि ये फिल्टर पानी में मौजूद कुछ आवश्यक तत्वों को ही खत्म कर देते हैं। उदाहरण के तौर पर कुछ फिल्टर पानी के भारीपन को पूरी तरह से मिटाने का दावा करते हैं। लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि असल में 'हार्ड वॉटर' से शरीर कोई नुकसान नहीं होता, सिवाए इसके कि वो बस पीने में अच्छा नहीं लगता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यूके में नल का पानी दुनिया का सबसे शुद्ध पीने लायक पानी माना जाता है। इस पानी ने लगभग 99 प्रतिशत टेस्ट पास किए और इसलिए ये फिल्टर के पानी से भी बेहतर है। वहीं विश्व स्वास्थ्य संस्थान का कहना है कि नल के पानी में भारीपन होता है जो हार्ट की बीमारियों के खतरे को कम करता है। बाजार में कई ऐसे पप्यूरीफायर मौजूद हैं जो पानी में से क्लोरीन की मात्रा को पूरी तरह खत्म करने का दावा भी करते हैं। गौरतलब है कि पानी में मौजूद कीटाणुओं को मिटाने के लिए क्लोरीन मिलाया जाता है। अगर ज्यादा क्लोरीन मिलाया जाए तो वो दिक्कत देता है। लेकिन एक्सपर्ट्स की मानें तो कम मात्रा में घुले क्लोरीन वाला पानी पीना सेहत के लिए खतरनाक नहीं है। वहीं पानी में मौजूद कुछ ऐसी अशुद्धियां भी होती हैं जिन्हें कोई प्यूरीफायर मिटाने का काम नहीं करता। ये हैं 'माइक्रोस्कोपिक फाइबर प्लास्टिक'। यूरोप में मौजूद 72 प्रतिशत पानी के सैंपल में इसकी मात्रा पाई गई है, लेकिन कोई फिल्टर इसे मिटा नहीं पाया है।
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