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म.प्र. में सत्ता-विपक्ष की स्वार्थपूर्ण राजनीति

म.प्र. में सत्ता-विपक्ष की स्वार्थपूर्ण राजनीति

admin | पोस्ट किया गया 516 दिन 20 घंटे पूर्व
21/03/2018
भोपाल धर्मेन्द्र सिंह ठाकुर मध्यप्रदेश में पिछले कुछ दिनों से महिला उत्पीड़न मामलों को लेकर भूचाल सा आ गया है। अखबार और इलेक्ट्रानिक्स मीडिया चैनल एवं सोशल मीडिया भी इन मामलों पर खूब सुर्खियां बटोरने से नहीं चूके। मीडिया ने तो अपना काम कर लिया लेकिन प्रदेश में सत्ता पक्ष, विपक्ष और अन्य राजनीतिक दल अपने स्वार्थ सिद्धि में रूचि लेते ही नजर आये। जो तीन घटनाएं प्रदेश के साथ-साथ देशभर में चर्चा का विषय रहीं उसकी शुरूआत एक कांग्रेसी विधायक सत्यदेव कटारे के ज्यादती मामले से शुरू हुई जो फिर आरती साहु और प्रीति रघुवंशी के आत्महत्या मामले पर सड़क से लेकर विधान सभा तक हंगामा जारी रहा। इन घटनाओं में एक विचित्र संयोग है कि एक का सम्बन्ध कांग्रेस पार्टी से तो एक का भाजपा से है और तीसरा साम्प्रदयिक मामले से रहा। सबसे पहले कांग्रेस विधायक सत्यदेव कटारे ने भोपाल में पढ़ रही एक छात्रा के खिलाफ ब्लैकमेल का आरोप लगाकर उसे जेल भिजवा दिया लेकिन जब छात्रा ने विधायक की पोल खोली तो मामला पलट गया और नतीजन विधायक दो महीने से फरार है। यहां कांग्रेस पार्टी छात्रा के विरूद्ध खड़ी न होकर कटारे के बचाव में लगी रही। हालांकि इस मामले में भाजपा सरकार कांग्रेस को विधानसभा में या बाहर जितना घेर सकती थी, नहीं घेर पाई। कारण कुछ भी हो भाजपा ने अपनी अंर्तकलह से कांग्रेस पर दबाव बनाने का एक मौका जाने दिया। राजधानी में ही अचानक दूसरी महिला उत्पीड़न की घटना ने भी हंगामा कर दिया जब एक मुस्लिम गुण्डे के कारण एक हिन्दू कालेज छात्रा ने आत्महत्या कर ली। इस मामले में कड़ी कार्यवाही करने से भाजपा सरकार और प्रशासन झिझका भी लेकिन कांग्रेस कहीं मुस्लिम नाराज नहीं हो जाएं इस कारण पूरी तरह चुप बैठी रही। एक प्रकार से देखा जाये तो इस मामले में सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया ने प्रशासन को कार्यवाही के लिए मजबूर किया और इस कार्यवाही ने एक प्रदेशव्यापी आंदोलन का रूप ले लिया। इस कार्यवाही से जरूर महिलओं को हिम्मत मिली है। लेकिन अगर कहा जाये कि सत्ता पक्ष या विपक्ष का इस कार्यवाही के लिए कोई योगदान रहा तो यह गलत होगा। इन पार्टियों का राजनीतिक स्वार्थ हाल ही में घटी प्रीति रघुवंशी की आत्महत्या के मामले में भी खुलकर सामने आ गया। इस मामले में कांग्रेस ने विधानसभा के अंदर और बाहर जिस प्रकार दिन-रात एक कर दिया वह 'स्वार्थपूर्ण उत्साह' देखते ही बनता था। चूंकि इस मामले में सरकार के मंत्री रामपाल सिंह के पुत्र शामिल थे सो कांग्रेस ने उनको निशाना बनाते हुए जो ओछी राजनीति खेली वह सबके सामने आ गई। भाजपा बचाव पक्ष तो कांग्रेस खिलाफत में हांलाकिं समझौते के तहत् मामला निपटा। कहने का तात्पर्य यही है कि मध्यप्रदेश में भी राजनैतिक पार्टियां अपने-अपने स्वार्थ सिद्ध करने में जुटी हुई हैं। यही कारण है कि आपराधिक मामलों में अंकुश नहीं लग पा रहा है।
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