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शक्ति अमोघ फलदायिनी है देवी महागौरी

शक्ति अमोघ फलदायिनी है देवी महागौरी

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 607 दिन 7 घंटे पूर्व
25/03/2018
भोपाल (महामीडिया) चैत्र नवरात्र के अंतर्गत चैत्र अष्टमी को अष्टम दुर्गा देवी महागौरी की पूजन की जाती है।। देवी महागौरी राहु ग्रह पर अपना आधिपत्य रखती हैं। महागौरी मनुष्य के वयोवृद्ध मृत देह की स्थिति को संबोधित करती हैं। शब्द महागौरी का अर्थ है महान देवी गौरी। महागौरी के तेज से संपूर्ण विश्व प्रकाशमय है। इनकी शक्ति अमोघ फलदायिनी है। दुर्गा सप्तशती के अनुसार देवी महागौरी के अंश से कौशिकी का जन्म हुआ जिसने शुंभ-निशुंभ का अंत किया। महागौरी ही महादेव की पत्नी शांभवी हैं। पौराणिक मतानुसार कालांतर में देवी पार्वती तपस्या के कारण शायमल हो जाती हैं ऐसे में महादेव उन्हें गंगा में स्नान करवाते हैं जिनसे देवी का वर्ण अत्यंत गौर हो जाता है, उनकी छटा चांदनी के सामन श्वेत हो जाती है ऐसे में महादेव देवी उमा को गौर वर्ण का वरदान देते हैं। सफ़ेद वस्त्र धारण किये हुए देवी श्वेत रंग के वृष पर सवार हैं। शास्त्रनुसार चतुर्भुजी देवी महागौरी अपनी ऊपरी दाईं भुजा में अभय मुद्रा से भक्तों को सुख प्रदान करती हैं, नीचे वाली दाईं भुजा में त्रिशूल से संसार पर अंकुश रखती है, ऊपरी बाईं भुजा में डमरू से सम्पूर्ण जगत का निर्वाहन करती हैं व नीचे वाली बाईं भुजा से देवी वरदान देती हैं। 
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