महामीडिया न्यूज सर्विस
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समाचार

  • आत्मबुद्धि व इष्टदेव बुद्धि

    भोपाल (महामीडिया) वैदिक और वैज्ञानिक दोनों ही सिद्धांतों पर महर्षि जी प्रणीत भावातीत ध्यान खरा बैठता है। इससे आत्मबुद्धि तथा इष्ट बुद्धि का सहज समन्वय हो जाता है। श्रीमद्भागवत में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि मैं अपने भक्त के हृदय में वास करता हूँ और उसे भी इसका बोध रहता है। जीव व इन्द्रियों के बीच जो ज्ञान है वह 'मन' कहलाता है। इसी प्रका >>और पढ़ें

  • बाह्य इन्द्रियों का संयम

    भोपाल (महामीडिया) बाह्य इन्दियों को संयमित करने से आंतरिक शक्तियों का उन्नयन होता है। भावातीत ध्यान शैली के नियमित अभ्यास से यह प्रक्रिया स्वतः प्रारंभ हो जाती है। श्रीमद्भागवत में भगवान को प्रसन्न करने के लिए सुझाये गये तीस लक्षणों में से "बाह्य इंद्रियों का संयम" भी एक लक्षण है। जो परमपिता परमेश्वर के समीप ले जाता है। अब तक हम इस श्र >>और पढ़ें

  • मानवता चेतना को जागृत करने का योग

    भोपाल (महामीडिया) 'भावातीत ध्यान' का अनुभव जो भी करना चाहता है उन सभी के लिये 'भावातीत ध्यान' उपलब्ध है। परमपूज्य महर्षि महेश योगी जी प्रदत्त यह ध्यान प्रक्रिया वैदिक योग विज्ञान पर आधारित है। यह मानव की चेतना को जागृत करने का योग है। प्रकृति भी चेतना द्वारा ही चलायमान है। यह चराचर विश्व अपनी गति से चल रहा है किंतु मानव भौतिकवादिता के मोह ë >>और पढ़ें

  • भावातीत ध्यान से 'सत्य' को आत्मसात करने की प्रेरणा मिलती है

    भोपाल (महामीडिया) भगवान को प्रसन्न करने के लिए श्रीमद्भागवत में तीस लक्षण बताये गये हें जिनके पालन से सर्वात्मा भगवान प्रसन्न होते है। वे तीस लक्षण इस प्रकार है- सत्य, दया, तपस्या, शौच, तितिक्षा, आत्म निरीक्षण, बाह्य इन्द्रियों का संयम, अन्तः इन्द्रियों का संयम, अहिंसा, ब्रह्मचर्य, त्याग, स्वाध्याय, सरलता, संतोष, समदृष्टि, सेवा, सदाचार, सुचे >>और पढ़ें

  • बाह्य इन्द्रियों का संयम, भावातीत ध्यान से संभव

    भोपाल (महामीडिया) भगवान को प्रसन्न करने के लिए श्रीमद्भागवत में तीस लक्षण बताए गए हैं। इस श्रृंखला में अब तक सत्य, दया, तपस्या, शोच, तितिक्षा तथा आत्मनिरीक्षण पर चर्चा कर चुके हैं। आज का विषय है बाह्य इन्द्रियों का संयम। समाज में व्याप्त नकारात्मकता व अवगुणों की आलोचना ने अनेक महत्वपूर्ण प्रतिभाओं को अपना शिकार बनाया है। इसका अर्थ यह ह >>और पढ़ें

  • मानवता चेतना को जागृत करने का योग

    भोपाल (महामीडिया) 'भावातीत ध्यान' का अनुभव जो भी करना चाहता है उन सभी के लिये 'भावातीत ध्यान' उपलब्ध है। परमपूज्य महर्षि महेश योगी जी प्रदत्त यह ध्यान प्रक्रिया वैदिक योग विज्ञान पर आधारित है। यह मानव की चेतना को जागृत करने का योग है। प्रकृति भी चेतना द्वारा ही चलायमान है। यह चराचर विश्व अपनी गति से चल रहा है किंतु मानव भौतिकवादिता के मोह ë >>और पढ़ें

  • भारत देश से ही विश्व शान्ति सम्भव

    भोपाल (महामीडिया) "विश्व शान्ति का स्वप्न और संकल्प न जाने कितने शाँति प्रियजनों ने देखा और लिया किन्तु यह केवल एक दिवास्वप्न ही रह गया। स्वप्न और संकल्प वास्तविक रूप से फलीभूत क्यों नहीं हुआ, इसका विश्लेषण किसी ने नहीं किया। शायद हर एक ने केवल बौद्धिक स्तर पर विचार और प्रचार करके अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली। आज भी यही हो रहा है। विश्व श >>और पढ़ें

  • विश्वभर ने 'योग' की सार्थकता को स्वीकार किया है

    भोपाल (महामीडिया) भागमभाग वाली जिंदगी और बदलती जीवनशैली के कारण आज हम किसी न किसी रोग से ग्रस्त हैं। लगभग 90 फीसदी भारतीय आज की बदलती जीवनशैली के कारण तनाव के शिकार हैं। सुविधाएं आपको स्वस्थ नहीं बना सकतीं। दुनिया के बड़े चिकित्सक, शोध संस्थान भी यह मान रहे हैं कि विचारों को सकारात्मक दिशा देकर स्वास्थ्य में बड़ा बदलाव किया जा सकता है जो कि ë >>और पढ़ें

  • एक व्रत और एक साधना है ब्रह्मचर्य

    भोपाल (महामीडिया) महर्षि दधिचि का अस्थि-दान और महाराज भगीरथ की घोर तपस्या के फलस्वरूप गंगावतरण हमें स्वयं के प्रति कठोर और लोक के प्रति उद्धार होने का संदेश देते हैं। भावातीत ध्यान शैली इन्द्रियानुशासन द्वारा हमें लोकमंगल हेतु समर्थ होने का पथ प्रशस्त करती है। "ब्रह्माणि चरतीति ब्रह्मचारी।" ब्रह्म का पठन, पाठन, चिन्तन तथा रक्षण करने >>और पढ़ें

  • भारतीय दर्शन की मूल भावना है 'अहिंसा'

    भोपाल (महामीडिया) परम पूज्य महर्षि महेश योगी जी कहा करते थे कि जो व्यक्ति अपनी अंतरनिहित चेतना को जागृत और उदात्त करने हेतु नित्य प्रति सहजगम्य भावातीत ध्यान करता है वह गीता में योगिराज श्रीकृष्ण प्रणीत वैश्विक आनंद का अंग बन जाता है। 
    अहिंसा का शाब्दिक अर्थ है कि किसी भी प्राणी को मन, वचन व कर्म से कष्ट नहीं पहुंचाना। महात्मा गा& >>और पढ़ें

  • बाह्य इन्द्रियों का संयम

    भोपाल (महामीडिया) बाह्य इन्दियों को संयमित करने से आंतरिक शक्तियों का उन्नयन होता है। भावातीत ध्यान शैली के नियमित अभ्यास से यह प्रक्रिया स्वतः प्रारंभ हो जाती है। श्रीमद्भागवत में भगवान को प्रसन्न करने के लिए सुझाये गये तीस लक्षणों में से "बाह्य इंद्रियों का संयम" भी एक लक्षण है। जो परमपिता परमेश्वर के समीप ले जाता है। अब तक हम इस श्र >>और पढ़ें

  • बाह्य इन्द्रियों का संयम

    भोपाल (महामीडिया) बाह्य इन्दियों को संयमित करने से आंतरिक शक्तियों का उन्नयन होता है। भावातीत ध्यान शैली के नियमित अभ्यास से यह प्रक्रिया स्वतः प्रारंभ हो जाती है। श्रीमद्भागवत में भगवान को प्रसन्न करने के लिए सुझाये गये तीस लक्षणों में से "बाह्य इंद्रियों का संयम" भी एक लक्षण है। जो परमपिता परमेश्वर के समीप ले जाता है। अब तक हम इस श्र >>और पढ़ें

  • गोरखनाथ मंदिर में अंतराष्ट्रीय योग दिवस की तैयारी पूरी

    गोरखपुर (महामीडिया) अंतराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर गोरखनाथ मंदिर में आयोजित होने वाले योग प्रशिक्षण शिविर और योग आध्यात्म व शिक्षक कार्यशाला की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। यह शिविर 15 सू 21 जून तक आयोजित किया जायेगा। इस कार्यक्रम में कटक, उड़ीसा के योग गुरु महंत शिवनाथ के अलावा पूर्वांचल के योग विशेषज्ञ और शिक्षाविद् हिस्सा लेंगे। अं&# >>और पढ़ें

  • अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर लांच होगा विश्व स्वास्थ्य संगठन का मोबाइल एप

    नई दिल्ली (महामीडिया) अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मोबाइल एप के जरिए दुनिया भर में योग के साथ-साथ मधुमेह और हाइपरटेंशन जैसी आधुनिक जीवनशैली से जुड़े रोगों के बारे में जानकारी देने का फैसला लिया है। इस मोबाइल एप को आगामी अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर लांच किया जा सकता है। इस एप से देश भर में खुल रहे हेल्थ एंड वेलनेस स&# >>और पढ़ें

  • योगं शरणं गच्छामी

    भोपाल (महामीडिया) जब मैं किसी के घर मिलने जाता हूँ तो वहाँ पदार्थों की ही विशेष चर्चा होती है। परिवार के सदस्य बताते हैं- आज हमने अमुक वस्तु क्रय की। यह लेटेस्ट मॉडल है। देखने में भी आता है कि उनके घर में एक-से-एक सुन्दर वस्तुओं को सजावट के रूप में रखा गया है, किन्तु वे केवल प्रदर्शन की वस्तुएँ हैं। उनका उपयोग घर के कार्यों में नहीं होता है। ऐस >>और पढ़ें


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