महामीडिया न्यूज सर्विस
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समाचार

  • विष्णु ने दिया था तुलसी को वरदान

    भोपाल [ महामीडिया ]शास्त्रोक्त मान्यता है भगवान विष्णु और उनके अवतार श्रीकृष्ण को तुलसी समर्पित करने से वे अति प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाओं को पूर्ण कर देते हैं। मान्यता है कि रोजाना तुलसी को एक लोटा जल चढ़ाने से सभी कष्टों का नाश होता है और जीवन में समृद्धि आती है।पौराणिक कथा के अनुसार एक समय राक्षस कुल में एक अत्यंत सु&# >>और पढ़ें

  • देवउठनी एकादशी को होता है तुलसी विवाह

    भोपाल (महामीडिया) कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी कहा जाता है। देवउठनी एकादशी कल है। देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी और शालीग्राम का विवाह कराया जाता है। यह विवाह एक आम विवाह की तरह होता है जिसमें शादी की सारी रस्में निभाई जाती हैं। बारात से लेकर विदाई तक सभी रस्में होती हैं। 
    पूजा विधि:
    सबसे पहले तुलसी के >>और पढ़ें

  • कल देवउठनी एकादशी है

    भोपाल (महामीडिया) कल देव प्रबोधिनी एकादशी पर देवगणों के जागने की परंपरा निभाई जाएगी। इसी दिन से विवाह समेत सभी शुभ कार्यों की शुरुआत होगी। एकादशी तिथि पर भगवान शालिग्राम एवं तुलसी माता का घर-घर में विवाह कराया जाएगा। इसके बाद ही विवाह योग्य युवक-युवतियों के विवाह की शहनाई, बैंड बाजे बजने लगेंगे। 
    कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकì >>और पढ़ें

  • 8 नवंबर को है प्रबोधिनी एकादशी

    भोपाल (महामीडिया) 8 नवंबर को पड़ रही देव प्रबोधिनी एकादशी पर देवगणों के जागने की परंपरा निभाई जाएगी। इसी दिन से विवाह समेत सभी शुभ कार्यों की शुरुआत होगी। एकादशी तिथि पर भगवान शालिग्राम एवं तुलसी माता का घर-घर में विवाह कराया जाएगा। इसके बाद ही विवाह योग्य युवक-युवतियों के विवाह की शहनाई, बैंड बाजे बजने लगेंगे। 
    कार्तिक मास की शुक् >>और पढ़ें

  • भगवान विष्णु के जागने का दिन "देवउठनी एकादशी"

    भोपाल (महामीडिया) चार माह की योग निद्रा से भगवान विष्णु के जागने का दिन होता है देवउठनी एकादशी। इसे देवोत्थान एकादशी या देवप्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के जागते ही चातुर्मास का समापन होता है और इसके चार दिन बाद बैकुंठ चतुर्दशी के दिन हरिहर मिलन होता है। यानी उस दिन भगवान शिव सृष्टि का कार्यभार पुनः भगवान विष्णु  >>और पढ़ें

  • आंवले के वृक्ष की पूजा से ये वरदान मिलते हैं

    भोपाल (महामीडिया) सनातन संस्कृति में प्रकृति पूजा को काफी महत्व दिया गया है। विभिन्न मासों में वृक्षों और वनस्पतियों की पूजा का प्रावधान किया गया है। नदियों, पर्वतों और पाषाणों की पूजा का विधान कर प्रकृति से नजदीकी और उसका आभार व्यक्त किया जाता है। प्राचीन धर्मशास्त्रों में पीपल, बरगद, आंवला, अशोक, हारश्रंगार तुलसी आदि पौधों की पूजा औ >>और पढ़ें

  • आज अक्षय नवमी है

    भोपाल (महामीडिया) आज आंवला नवमी है। कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को आंवला नवमी मनाई जाती है, इसे अक्षय नवमी भी कहा जाता है। इस दिन महिलाएं आंवला के पेड़ के नीचे बैठकर संतान की प्राप्ति व उसकी रक्षा के लिए पूजा करती हैं। वैसे तो पूरे कार्तिक मास में पवित्र नदियों में स्नान का माहात्म्य है, परंतु नवमी को स्नान करने से अक्षय पुण्य होता है >>और पढ़ें

  • 8 नवंबर को मनाया जायेगा तुलसी विवाह का त्योहार

    भोपाल (महामीडिया) हिंदू धर्म में तुलसी पूजा को काफी महत्वपूर्ण बताया गया है। माना जाता है कि जिस घर में तुलसी की पूजा होती है, वहां तुलसी का वास होता है और परिवार की सुख समृद्धि बनी रहती है। कार्तिक माह की एकादशी को तुलसी विवाह का आयोजन किया जाएगा। इस वर्ष तुलसी विवाह की खास पूजा 8 नवंबर को की जाएगी। ऐसी मान्यता है कि देवउठनी एकादशी पर मनाए ज&# >>और पढ़ें

  • छठ मैय्या को अत्यंत प्रिय हैं चावल के लड्‍डू

    नई दिल्ली [ महामीडिया ] छठ मैय्या को अत्यंत प्रिय हैं चावल के लड्‍डू ।500 ग्राम चावल आटा, 100 ग्राम घी, 100 ग्राम रवा, 400 ग्राम शकर, 50 ग्राम दूध, 50 ग्राम मेवे की कतरन, आधा चम्मच इलायची पावडर, पाव चम्मच केवड़ा एसेंस। विधि -सबसे पहले एक कड़ाही में घी डालकर चावल का आटा हल्का गुलाबी होने तक सेंक लें, फिर रवा भी इसी प्रकार सेंक लें। दोनों को थाली में डालकर अच्छी तरह मि >>और पढ़ें

  • मांगलिक कार्य प्रारंभ होने का दिन "देवउठनी एकादशी"

    भोपाल (महामीडिया) देवउठनी एकादशी से सभी मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाते हैं। माना जाता है कि इस दिन सभी देवता अपनी योग निद्रा से जग जाते हैं। देवउठनी एकादशी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को आती है। इस साल ये तिथि 8 नवंबर को पड़ रही है। इस एकादशी को हरिप्रबोधिनी एकादशी, देवोत्थान एकादशी और देव उठनी ग्यारस के नाम से भी जाना जाता है।  >>और पढ़ें

  • अक्षय फल प्रदान करती है आंवला नवमी

    भोपाल (महामीडिया) आंवला नवमी का त्योहार कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के दिन मनाया जाता है। इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा की जाती है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने अपनी सभी बाल लीलाओं का त्याग करके अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़े थे। इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने गोकुल का त्याग करके मथुरा की और प्रस्थान किया था। अक्षय नवमी >>और पढ़ें

  • महापर्व छठ के दूसरे दिन आज होगी खरना की पूजा

    पटना (महामीडिया) लोक आस्था का महापर्व छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान गुरुवार को नहाय-खाय के साथ आरंभ हो गया है। व्रत के दूसरे दिन आज शाम में खरना की पूजा होगी। खरना के लिए व्रतियों ने सुबह से निर्जला व्रत रखा है, जिसके बाद आज शाम में व्रती गेहूं के आटे की रोटी, गुड़़-चावल और दूध से बनी खीर के साथ फल-फूल, मिठाई से खरना की पूजा करेंगी और पूजा के बाद प्रस >>और पढ़ें

  • छठ पर्व का आज दूसरा दिन

    नई दिल्ली (महामीडिया) सूर्य देवता की आराधना का पर्व छठ का प्रारंभ गुरुवार को नहाय खाय के साथ हो गया। इस सूर्य देव और छठी मैया की आराधना प्रारंभ होती है। कार्तिक शुक्ल छठ से प्रारंभ हुआ छठ महोत्सव चार दिनों तक चलता है। इसके पहला दिन नहाय खाय का होता है। इसके बाद दूसरे दिन खरना किया जाता है। खरना का अर्थ लोकसंस्कृति में शुद्धिकरण होता है। छठ >>और पढ़ें

  • लोक आस्था का महापर्व 'छठ'

    भोपाल (महामीडिया) लोक आस्था के महापर्व 'छठ' का हिंदू धर्म में अलग महत्व है। यह एकमात्र ऐसा पर्व है जिसमें ना केवल उदयाचल सूर्य की पूजा की जाती है बल्कि अस्ताचलगामी सूर्य को भी पूजा जाता है। वैसे तो इस पर्व को पहले बिहार में ही मनाया जाता था लेकिन अब इस पर्व की गूंज पूरे देश में सुनाई देती है, सूर्य षष्ठी व्रत होने के कारण इसे 'छठ' भी कहा जाता है, 'प& >>और पढ़ें

  • देवउठनी ग्यारस के 11 दिन बाद होंगे विवाह

    भोपाल (महामीडिया) चार माह के शयन के बाद भगवान श्रीहरि विष्णु देवउठनी ग्यारस पर 8 नवंबर को जागेंगे लेकिन वैवाहिक आयोजनों का दौर 19 नवंबर से शुरू होगा। इस बार पंचांगों में विवाह के शुद्ध मुहूर्त देवउठनी ग्यारस के 11 दिन बाद दिए गए हैं। हालांकि मतमतांतर के साथ अबूझ मुहूर्त में से एक माने जाने वाले देव प्रबोधनी एकादशी पर भी वैवाहिक आयोजन होंगेð >>और पढ़ें


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