CBSE ने प्रैक्टिकल परीक्षा की प्रक्रिया में बदलाव किया  http://www.mahamediaonline.com

CBSE ने प्रैक्टिकल परीक्षा की प्रक्रिया में बदलाव किया 

नई दिल्ली (महामीडिया) केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद ने सत्र 2019-20 से प्रैक्टिकल परीक्षा की पूरी प्रक्रिया बदल दी है। इस बार परीक्षा के दौरान तीन बार बोर्ड के पास लैब के फोटो जाते हैं जिसमें छात्रों, परीक्षकों और ऑब्जर्वर दिखने चाहिए। परीक्षा समाप्त होते ही इसके अंक भी बोर्ड को भेजना अनिवार्य है।
सीबीएसई ने पहली बार लिखित परीक्षा की तरह प्रैक्टिकल एग्जाम के भी सेंटर डालने का निर्णय लिया था। इसे लेकर स्कूलों ने आपत्ति जताई थी। बोर्ड ने आपत्तियां स्वीकार करते हुए इसमें कई बदलाव कर दिए। इससे प्रैक्टिकल की मॉनीटरिंग की जाने लगी। इससे पूर्व की व्यवस्था में प्रैक्टिकल परीक्षा की कोई विशेष मॉनीटरिंग नहीं होती थी।
यह बदलाव किए गए: जिस सेंटर पर प्रैक्टिकल परीक्षा होती है उसमें परीक्षक के पहुंचते ही जियो टैग के साथ फोटो बोर्ड को भेजी जाती है। जियो टैग से यह स्पष्ट हो जाती है कि लोकेशन कहां है। जब प्रैक्टिकल शुरू होता है उसके बाद तीन बार इसी प्रक्रिया को दोहराना होता है। आखिर में ऑनलाइन अंक भी बोर्ड को परीक्षा समाप्त होने के कुछ ही समय में भेजना अनिवार्य कर दिया गया है। परीक्षा समाप्त होने के अगले दिन के लिए कोई बिंदु नहीं छोड़ा जाता है।
ऑब्जर्वर भी तैनात किए: पहली बार 100 या इससे ज्यादा छात्र संख्या वाले स्कूलों में एक-एक ऑब्जर्वर भी भेजा गया है। ऑब्जर्वर पूरे प्रैक्टिकल पर निगाह रखेगा और इसकी रिपोर्ट सीधे बोर्ड को भेजेगा। यह रिपोर्ट भी उसी समय भेजनी होगी। जो ऑब्जर्वर भेजे जा रहे हैं उनमें आवश्यक नहीं है कि वे विज्ञान विषयों के ही हों। लैब कैसी है इसकी जानकारी भी बोर्ड को मिल जाएगी। प्रैक्टिकल परीक्षाएं फरवरी के पहले सप्ताह तक चलनी हैं।
 

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