कांग्रेस प्रमुख के रूप में सोनिया की वापसी ...

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भोपाल (महामीडिया) 72 वर्षीय सोनिया गांधी को कांग्रेस पार्टी का अंतरिम अध्यक्ष चुना गया है, मुश्किल से 20 महीने बाद ही जब उन्होंने स्वेच्छा से अपने बेटे, राहुल गांधी के लिए पद छोड़ा था, जिन्होंने २०१९ लोकसभा चुनावों में पार्टी के अपमानजनक प्रदर्शन के बाद कांग्रेस अध्यक्ष पद पर बने रहने से इनकार कर दिया था। 
कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) ने देर रात शनिवार को यह फैसला किया कि सोनिया गांधी तब तक अंतरिम प्रमुख रहेंगी, जब तक पार्टी का कोई विधिवत अध्यक्ष नहीं बन जाता। सोनिया की वापसी, कांग्रेस पार्टी के लिए एक अच्छा संकेत है। सीडब्ल्यूसी द्वारा उन्हें अध्यक्ष पद सौंपने का यह निर्णय, पार्टी को एकजुट करने के लिए बहुत निर्णायक है।  क्योंकि देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी, ख़ासकर पिछले लोकसभा चुनावों में हार के बाद 'विद्रोह की आवाज़' का सामना कर रही है।
अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण का करन सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया, मिलिंद देवड़ा, दीपेंद्र हुड्डा और अन्य कुछ बड़े नेताओं ने खुलकर समर्थन किया था जिससे पार्टी में फूट सामने आयी थी। राज्यसभा में कांग्रेस के व्हिप भुवनेश्वर कलिता के रूप में पार्टी को धोका भी मिला। कई वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के नेतृत्व से खुश नहीं थे और इसमें कोई शक नहीं कि कांग्रेस को मजबूत नेतृत्व की सख्त जरूरत थी। सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष पद पर बने रहने का गौरव हासिल करने के बाद, सोनिया को इस संकट की घडी में अपनी पार्टी को बाहर निकालने की उम्मीद है।
बाइंडिंग एजेंट के रूप में काम करने के अलावा, सोनिया गांधी अपने इतने बड़े नेतृत्व अनुभव के साथ किसी भी संभावित विद्रोह को रोकने में मदद करेंगी। पद की लड़ाई में राज्य इकाइयों में किसी दरार की संभावना को देखते हुए उन्हें एकजुट रखने में भी वह भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।   
जब कांग्रेस जैसी केंद्रीय पार्टी का पतन होता है, तो उसके पुनर्निमाण की प्रक्रिया बहुत लंबी और थकाऊ होती है। हालांकि, सोनिया के लिए कांग्रेस को फिर से मजबूत करना और भाजपा द्वारा पैदा की गई सत्ता विरोधी लहर को रोकना एक कठिन काम होगा।
वंशवाद की गोली से बचने के लिए, राहुल गांधी ने स्पष्ट रूप से कहा था कि न तो उनकी मां और न ही उनकी बहन उनकी जगह लेंगी । लेकिन, परिस्थितियों के आगे झुकते हुए, उनकी माँ को एक स्टॉपगैप (कामचलाऊ) नेता के रूप में आना ही पड़ा।