छह साल वीरान रही गरुड़चट्टी फिर आबाद हुई

छह साल वीरान रही गरुड़चट्टी फिर आबाद हुई

रुद्रप्रयाग  [ महामीडिया ]  वर्ष 2013 की आपदा से पूर्व केदारनाथ यात्रा के महत्वपूर्ण पैदल पड़ावों में शामिल रही गरुड़चट्टी छह वर्ष अलग-थलग रहने के बाद फिर आबाद हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत हुए निर्माण कार्यों के क्रम में गरुड़चट्टी को साढ़े तीन किमी नया पैदल मार्ग तैयार कर केदारनाथ धाम से पुन: जोड़ दिया गया है। गरुड़चट्टी आपदा से पहले महत्वपूर्ण चट्टी (पड़ाव) हुआ करती थी। कुदरत के खेल वाकई निराले होते हैं, लेकिन सूक्षमता से समझने पर ही इन्हें समझा जा सकता है। वर्ष 1985-86 में नरेंद्र मोदी एक सामान्य साधक की भांति केदारनाथ क्षेत्र में साधनारत थे। केदारनाथ से साढ़े तीन किलोमीटर दूर स्थित पर्वत पर मौजूद गरुड़चट्टी में बनी साधना स्थली में तप और साधना किया करते थे। भगवान केदारनाथ का जलाभिषेक करने को वे प्रतिदिन गरुड़चट्टी से केदारनाथ तक पैदल आया करते थे। दोनों स्थानों के मध्य पैदल पथ बना हुआ था। वही पथ 16-17 जून 2013 को आई भीषण आपदा में पूरी तरह भूस्खलन की चपेट में आ गया। मंदाकिनी नदी पर केदारपुरी से गरुड़चट्टी को जोड़ने वाला पैदल पुल भी सैलाब की भेंट चढ़ गया। इसके बाद से गरुड़चट्टी पूरी तरह अलग-थलग हो वीरान पड़ गई।अगले ही साल, यानी 2014 में नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने और तीर्थ क्षेत्र को आपदा ने जो जख्म दिए थे, उन्हें मिटाना उनकी प्राथमिकता हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत इस क्षेत्र में हुए निर्माण कार्यों में इस पैदल पथ का पुनर्निमाण भी अहम था। प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने के बाद गरुड़चट्टी को साढ़े तीन किमी नया पैदल मार्ग तैयार कर केदारनाथ धाम से जोड़ दिया गया है। ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत केदारनाथ की पहाड़ी पर तीन ध्यान गुफाओं का निर्माण भी किया गया है। इनमें रुद्र ध्यान गुफा प्रमुख है।
 

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