पौराणिक स्वरूप में निखारा जाएगा केदारनाथ का पैदल यात्रा मार्ग

पौराणिक स्वरूप में निखारा जाएगा केदारनाथ का पैदल यात्रा मार्ग

देहरादून [ महामीडिया ]नए कलेवर में निखर रही केदारपुरी की तरह अब केदारनाथ पैदल यात्रा मार्ग पर भी 'ओम नमः शिवाय' की अनुगूंज श्रद्धालुओं में आस्था और आध्यात्म का नया स्वरूप प्रदान करेगी। इस मार्ग पर अलग-अलग थीम पर कार्य किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये केदारनाथ में चल रहे पुननिर्माण कार्यों की समीक्षा के दौरान निर्देश दिए कि पैदल यात्रा मार्ग को श्रद्धा और आध्यात्म के साथ ही केदारनाथ की पौराणिक और ऐतिहासिक जानकारियों का समावेश करते हुए इसको विकसित किया जाए। पर्वतीय इलाके की व्यवहारिक दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए मार्ग की कार्ययोजना तैयार की जाए।केदारपुरी का पुनर्निर्माण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट का हिस्सा है और वह निरंतर पुनर्निर्माण कार्यों की मॉनीटरिग कर रहे हैं। 10 जून को उन्होंने केदारनाथ में चल रहे पुनर्निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए आवश्यक निर्देश प्रदान किए थे। बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी ने फिर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पुनर्निर्माण कार्यों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि यात्रा मार्ग पर होने वाले कार्यों में स्थानीय स्थापत्य कला का खास ध्यान रखा जाए। पैदल यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं के रुकने के लिए आश्रय स्थल बनाने, यात्रा मार्ग के समीप घोड़ों के लिए एक नियत स्थान बनाने के निर्देश भी उन्होंने दिए।मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बताया कि केदारनाथ पैदल यात्रा मार्ग पर आध्यात्मिक वातावरण और स्थानीय स्थापत्य कला के साथ ही केदारनाथ से जुड़े वैदिक साहित्य, महाकाव्य, केदारखंड, पांडुलिपियों में वर्णित जानकारियों का समावेश किया जाएगा। यात्रा मार्ग पर "ओम नमः शिवाय" की ध्वनि भी गुंजायमान होगी। सरस्वती घाट और आस्था पथ का कार्य पूरा हो चुका है। आदि शंकराचार्य की समाधि स्थल का कार्य तय अवधि में पूरा कर लिया जाएगा। ब्रह्माकमल वाटिका के चयनित स्थल पर तकनीकी परीक्षण के बाद कार्य शुरू किया जाएगा। प्रस्तुतीकरण में यह बताया गया कि केदारनाथ में संग्रहालय और पैदल यात्रा मार्ग पर केदारनाथ के पौराणिक महत्व के साथ ही भगवान शिव से जुड़े चित्रों, पांडुलिपियों को विभिन्न माध्यमों से दिखाया जाएगा। मंदिर के स्वरूप और केदारनाथ से जुड़े 1882 से अब तक के संस्मरणों को भी इसमें प्रदर्शित किया जाएगा। पैदल यात्रा मार्ग पर गौरीकुंड से केदारनाथ तक पेंटिंग, गैलरी, पुरातात्विक मूर्तियां, ध्यान-योग, आध्यात्म जैसी थीम पर कार्य किए जाने की भी योजना है।
 

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