पचमढ़ी की नागद्वारी यात्रा पर पहली बार रोक लगी

पचमढ़ी की नागद्वारी यात्रा पर पहली बार रोक लगी

भोपाल [ महामीडिया ] आदिवासी समुदाय के लिए अमरनाथ यात्रा जैसे महत्व की पचमढ़ी की नागद्वारी यात्रा पर इस बार प्रशासन ने रोक लगा दी है। इस पवित्र यात्रा पर हर साल 5 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचते थे। सावन माह के कृष्ण पक्ष में दस दिन तक यह यात्रा चलती है। पचमढ़ी से पैदल करीब 12 किमी तक दुर्गम पहाड़ियों के मार्ग से श्रद्धालु पवित्र नागद्वार गुफा मंदिर पहुंचते हैंआदिवासी समुदाय में मान्यता है कि इस यात्रा को करने से शारीरिक व मानसिक शक्ति के साथ ही अध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है। इस यात्रा के आरंभ होने का कोई लिखित दस्तावेज नहीं है। यहां कोरकू, गोंड व गोली आदिवासी समुदाय के लोग प्राचीनकाल से निवासरत हैं। पचमढ़ी के राजा भभूत सिंह ने 1857 में यहां ब्रिटिश घुसपैठियों को परास्त करते हुए खदेड़ दिया था। बाद में धोखे से ब्रिटिश कैप्टन जे. फॉरसोथ ने राजा भभूत सिंह की हत्या करके पचमढ़ी को सेना की छावनी बना दिया था।यहां की विशाल प्राकृतिक संपदा को देखते हुए कैप्टन फॉरसोथ ने 1860 में इसे संरक्षति वन क्षेत्र घोषित कर दिया। तब से यह इलाका सरकार के अधीन संरक्षति है। यह पूरा इलाका पचमढ़ी अभयारण्य, बोरी अभयारण्य और सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत आता है। सामान्य दिनों में यहां लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध है, लेकिन नागद्वारी यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को आवागमन की पूरी छूट रहती है।होशंगाबाद जिले में सतपुड़ा की रानी के नाम से प्रसिद्ध पचमढ़ी में धूपगढ़ और गुप्त गंगा दो मार्गों से नागद्वारी यात्रा आरंभ होती है। धूपगढ़ मप्र की सबसे ऊंची 1352 मीटर पहाड़ी है। इसलिए इस मार्ग से कम लोग यात्रा करते हैं। ज्यादातर श्रद्धालु गुप्त गंगा मार्ग से यात्रा करते हैं। हर साल औसत रूप से पांच लाख श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां होशंगाबाद, छिंदवाड़ा, बैतूल, हरदा और प्रदेश के अन्य जिलों के अलावा महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, गुजरात, राजस्थान इत्यादि प्रांतों से भी श्रद्धालु आते हैं। इस साल 5 जुलाई से सावन माह के आरंभ होते ही नागद्वारी यात्रा शुरू होना थी। लेकिन प्रशासन द्वारा रोक लगाने से सभी मार्गों पर पुलिस ने बैरिकेड्स लगा दिए गए हैं।नागद्वारी यात्रा के संबंध में आदिवासी समुदाय की मान्यता है कि उनके आराध्य बड़ादेव भगवान शिव ने यहां स्वर्ण द्वार बनाया है। यहां से नागलोक के दर्शन होते हैं। कोरकू समुदाय के फागराम बताते हैं कि नागद्वारी यात्रा से शारीरिक व मानसिक शक्ति के साथ ही अध्यात्मिक ऊर्जा मिलती है। इस यात्रा को पूरा करने पर स्वर्ग के दर्शन की अनुभूति होती है। यहां पहाड़ पर अनेक गुफा व मंदिर हैं। जिनमें भगवान शिव व नागदेव की प्रतिमाएं स्थापित हैं। लोग यहां अपनी मन्नातें लेकर आते हपचमढ़ी में पर्यटकों के आवागमन की प्रशासन ने अनुमति दे दी है। इस कारण यहां रोजाना सौ से अधिक पर्यटक पहुंच रहे हैं। पर्यटकों की थर्मल स्क्रीनिंग करने के बाद पर्यटन केंद्रों के लिए प्रवेश दिया जा रहा है। पर्यटकों के लिए नागद्वारी मंदिर को छोड़कर पचमढ़ी के अन्य सभी पर्यटन स्थलों पर जाने की अनुमति है।शासन की गाइड लाइन के अनुसार कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए नागद्वारी यात्रा पर रोक लगाई गई है। इस बार श्रद्धालुओं को यात्रा करने की अनुमति नहीं रहेगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।- मदनसिंह रघुवंशी, एसडीएम, पिपरिया।

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